Business News: प्रमुख तेल उत्पादक देश संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ओपेक संगठन से बाहर निकलने का बड़ा फैसला लिया है। यह ऐतिहासिक कदम भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए बेहद अच्छी खबर है। इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई तेजी से बढ़ेगी। सप्लाई बढ़ने से भविष्य में तेल की कीमतों में भारी गिरावट आने की पूरी संभावना है। भारत के लिए यह लंबी अवधि में सस्ते तेल का एक शानदार अवसर पैदा करेगा।
यूएई बढ़ाएगा कच्चे तेल का उत्पादन
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ मानते हैं कि यूएई अब बिना किसी दबाव के अपनी पूरी क्षमता से तेल उत्पादन कर सकेगा। ओपेक अपने सदस्य देशों के लिए तेल उत्पादन का एक सख्त दैनिक कोटा तय करता है। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल सप्लाई को नियंत्रित करके कीमतों को स्थिर रखना होता है। दुनिया भर के तेल उत्पादन में ओपेक देशों की चालीस प्रतिशत हिस्सेदारी है। अब यूएई के स्वतंत्र होने से बाजार में कच्चा तेल अधिक आएगा।
भारत को मिलेगी सस्ती दरों पर सप्लाई
यूएई भारत का बहुत पुराना और भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार है। ओपेक के नियमों से आजाद होने के बाद भारत सीधे यूएई के साथ रियायती दरों पर लंबे समझौते कर सकता है। भारत अपनी जरूरत का पच्चासी प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अगर कच्चा तेल पांच से दस डॉलर प्रति बैरल भी सस्ता होता है, तो भारत का आयात बिल काफी कम हो जाएगा। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
होर्मुज जलमार्ग पर खत्म होगी निर्भरता
यूएई के पास हबशान फुजैरा पाइपलाइन का बड़ा रणनीतिक विकल्प मौजूद है। यह अहम पाइपलाइन होर्मुज जलमार्ग के बाहर से होकर गुजरती है। इसके माध्यम से भारत को कच्चे तेल की बिना किसी रुकावट के सप्लाई मिल सकेगी। अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय होर्मुज जलमार्ग अक्सर व्यापारिक बाधाओं का सामना करता है। इस नई व्यवस्था से होर्मुज जलमार्ग पर भारत की निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। यह भारत के सामरिक हितों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
सऊदी अरब के वर्चस्व से तनातनी
वियना स्थित ओपेक गठबंधन पर हमेशा से सऊदी अरब का दबदबा रहा है। सऊदी अरब ने लगातार उत्पादन कम करने की नीतियां लागू करवाई हैं। हाल के दिनों में यूएई और सऊदी अरब के बीच क्षेत्रीय राजनीति को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। यूएई ने तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का भारी निवेश किया है। ओपेक के सख्त प्रतिबंधों के कारण वह अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा था।
सत्तर डॉलर से नीचे आ सकते हैं दाम
यूएई वर्तमान में लगभग उनतीस लाख बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन करता है। उसकी कुल क्षमता अड़तालीस लाख बैरल से ज्यादा है। यूएई का लक्ष्य अगले साल तक इसे पचास लाख बैरल तक पहुंचाना है। अगर यूएई ने बाजार में आक्रामक तरीके से तेल बेचना शुरू किया, तो कीमतें गिरेंगी। आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि कच्चा तेल सत्तर डॉलर प्रति बैरल से नीचे भी आ सकता है। अमेरिका ने भी इस कदम की सराहना की है।


