Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश सरकार असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है। अब श्रमिकों को केवल अस्थायी चिकित्सा शिविरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकार उन्हें स्थायी और पूरी तरह कैशलेस इलाज की सुविधा से जोड़ने जा रही है। इसके साथ ही शहरों में काम की तलाश में आने वाले मजदूरों के लिए किफायती हॉस्टल सुविधा शुरू करने की तैयारी भी अंतिम चरण में है।
मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से मिलेगा सुरक्षा कवच
प्रदेश में ई-श्रम पोर्टल पर लगभग 8.42 करोड़ असंगठित श्रमिक पंजीकृत हैं। इनमें से एक बड़ा वर्ग अब भी ईएसआई और आयुष्मान भारत जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं के दायरे से बाहर है। इसे देखते हुए श्रम विभाग इन श्रमिकों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसके लागू होने से मजदूरों को गंभीर बीमारियों की जांच, सर्जरी और दवाओं के लिए जेब से पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे।
शहरों में रहने की चिंता होगी दूर और मिलेगी छत
काम की तलाश में ग्रामीण इलाकों से शहरों की ओर रुख करने वाले श्रमिकों के लिए आवासीय संकट एक बड़ी चुनौती रहती है। सरकार ने इस समस्या के समाधान हेतु अब विशेष हॉस्टल बनाने की योजना बनाई है। इन हॉस्टलों में श्रमिकों को सुरक्षित और सस्ती दरों पर रहने की जगह उपलब्ध कराई जाएगी। इससे न केवल उनके रहने का खर्च कम होगा, बल्कि कार्यस्थलों के पास सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
श्रमिकों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति और आर्थिक मदद
वर्तमान में 24 हजार रुपये से कम मासिक आय वाले श्रमिकों के कल्याण के लिए श्रम कल्याण परिषद आठ विशेष योजनाएं संचालित कर रही है। इन योजनाओं के तहत बच्चों की उच्च शिक्षा, खेलों में भागीदारी, कन्यादान और धार्मिक पर्यटन के लिए 2,500 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। हालांकि, जागरूकता की कमी के कारण अभी कम आवेदन आ रहे हैं, जिसे सुधारने हेतु सरकार नए प्रयास कर रही है।
चार नई श्रम संहिताओं से बदलेगी पूरी व्यवस्था
केंद्र सरकार द्वारा 29 पुराने कानूनों को मिलाकर तैयार की गई चार नई श्रम संहिताएं प्रदेश में लागू होने के लिए तैयार हैं। इनमें वेतन, औद्योगिक संबंध, कार्यस्थल सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा (पीएफ, ग्रेच्युटी) से संबंधित स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार इन संहिताओं के आधार पर अपनी नई नियमावली तैयार कर रही है। इससे न केवल उद्योगों का परिचालन सुगम होगा, बल्कि गिग वर्कर्स और दैनिक वेतनभोगियों को भी कानूनी सुरक्षा प्राप्त होगी।
खाद्य सुरक्षा और सामाजिक न्याय की ओर बढ़ते कदम
पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कारखानों में लगभग 3 लाख पंजीकृत श्रमिक कार्यरत हैं। सरकार ने अब तक 7.06 करोड़ से अधिक मजदूरों को राशन कार्ड की सुविधा मुहैया करा दी है। हाल ही में करीब 35 लाख ऐसे श्रमिकों को भी खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ दिया गया है जो पहले इससे वंचित थे। बच्चों के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजनाओं को भी डिजिटल माध्यम से और अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा है।


