New Delhi News: केंद्र सरकार ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे खौफनाक साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए कमर कस ली है। उच्चतम न्यायालय में दाखिल एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इन घोटालों से निपटने के लिए एक व्यापक बहुस्तरीय रणनीति लागू की है। इस मुहिम में सीबीआई, आरबीआई और प्रमुख टेक कंपनियां एक साथ मिलकर काम कर रही हैं। गृह मंत्रालय के साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने कोर्ट को बताया है कि इस दिशा में अब तक कई कठोर कदम उठाए गए हैं।
व्हाट्सऐप के 9,400 खाते निलंबित, अब संदिग्ध कॉल पर मिलेगी चेतावनी
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने अदालत को सूचित किया कि इस वर्ष जनवरी से व्हाट्सऐप ने एक विशेष अभियान चलाकर 9,400 संदिग्ध खातों को प्रतिबंधित किया है। ठगी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए व्हाट्सऐप अब ‘लोगो’ पहचानने की नई तकनीक पर काम कर रहा है। इसके अलावा, अब यूजर्स को ‘हाल ही में बनाए गए’ या ‘कम समय से सक्रिय’ खातों से कॉल आने पर तत्काल चेतावनी दी जाएगी। इससे भोले-भले नागरिकों को डराकर पैसे वसूलने वाले ठगों पर लगाम लगेगी।
सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में बायोमेट्रिक अनिवार्य
धोखाधड़ी रोकने के लिए दूरसंचार विभाग फर्जी सिम कार्डों को निष्क्रिय करने की समयसीमा घटा रहा है। सरकार दिसंबर 2026 तक पूरे देश में बायोमेट्रिक पहचान सत्यापन प्रणाली (BIVS) लागू करने की योजना बना रही है। इस नई व्यवस्था के तहत सिम कार्ड जारी करते समय हर नेटवर्क पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। अब बिना पहचान पुख्ता किए सिम लेना लगभग नामुमकिन होगा। संदिग्ध सिमों की पहचान होते ही उन्हें तत्काल ब्लॉक करने की प्रक्रिया को और तेज किया जा रहा है।
आरबीआई और सीबीआई की नई जांच गाइडलाइंस
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संदिग्ध लेनदेन को रोकने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की है। इसके तहत संदिग्ध पाए जाने वाले बैंक खातों की गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी जाएगी। वहीं, सीबीआई ने अब 10 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान वाले ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों की सीधी जांच करने का निर्णय लिया है। वित्तीय नियामकों और डिजिटल प्लेटफार्मों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समिति लगातार बैठकों के जरिए रणनीति को धार दे रही है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: पीड़ितों के मुआवजे पर भी चर्चा
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों का स्वत: संज्ञान लिया है। अदालत ने आरबीआई और दूरसंचार विभाग को निर्देश दिया है कि वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ के पीड़ितों को मुआवजा देने की व्यवस्था पर संयुक्त बैठक करें। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि साइबर सुरक्षा के मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि प्रस्तावित सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए संबंधित विभागों को कड़े निर्देश जारी किए जाएं।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ और कैसे बचें?
डिजिटल अरेस्ट में अपराधी खुद को सीबीआई, पुलिस या अदालती अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ितों को डराते हैं कि उनका नाम किसी अवैध पार्सल या अपराध में आया है। इसके बाद उन्हें घंटों तक कैमरे के सामने रहने को मजबूर किया जाता है और रिहाई के बदले मोटी रकम मांगी जाती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती है। ऐसे किसी भी कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर देनी चाहिए।
