West Bengal News: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने मतगणना कर्मियों की नियुक्ति के मामले में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की विशेष बेंच ने सुनवाई पूरी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग को अपने कर्मचारी चुनने का पूरा अधिकार है। इस फैसले के बाद टीएमसी की उन आशंकाओं पर विराम लग गया है, जो केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर जताई गई थीं।
कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश बरकरार, टीएमसी की दलीलें खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 30 अप्रैल के आदेश को सही ठहराया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयोग निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र है। आयोग का फैसला चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लिया गया है। अदालत को इसमें कोई भी संवैधानिक अवैधता नजर नहीं आई। टीएमसी ने हाईकोर्ट के इसी फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। अब ममता बनर्जी की याचिका खारिज होने से आयोग का आदेश पूरी तरह प्रभावी रहेगा।
कपिल सिब्बल ने कोर्ट में रखीं ये चार गंभीर आशंकाएं
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ममता बनर्जी का पक्ष रखते हुए चार मुख्य बिंदु उठाए। सिब्बल ने कहा कि राज्य सरकार को नोटिस की जानकारी बहुत देरी से मिली। उन्होंने हर बूथ पर गड़बड़ी होने की आशंका जताई और केंद्र सरकार के अधिकारियों की जरूरत पर सवाल किए। सिब्बल का तर्क था कि ‘माइक्रो ऑब्जर्वर’ के रूप में पहले से ही केंद्रीय कर्मी मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के प्रतिनिधियों को जानबूझकर मतगणना प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: कर्मचारी सिर्फ सरकार के होते हैं
बेंच ने सिब्बल की दलीलों पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि कर्मचारी चाहे राज्य के हों या केंद्र के, वे सभी सरकारी सेवक हैं। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग का हर कर्मचारी पर पूर्ण नियंत्रण होता है। आयोग किसी भी निष्पक्ष कर्मचारी को चुनाव कार्य में लगा सकता है। अदालत ने साफ किया कि राजनीतिक दलों से सहमति लेना अनिवार्य नहीं है। सर्कुलर का पूरी तरह पालन होगा और किसी नए आदेश की आवश्यकता नहीं है।
चुनाव आयोग ने दी सफाई: बेबुनियाद हैं अनियमितता के आरोप
चुनाव आयोग की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट डीएस नायडू ने टीएमसी की आशंकाओं को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि आयोग पूरी तरह नियमों के दायरे में रहकर काम कर रहा है। नायडू ने तर्क दिया कि हर उम्मीदवार का अपना काउंटिंग एजेंट वहां मौजूद रहता है। ऐसे में धांधली या अनियमितता की बात कहना पूरी तरह से बेमानी है। आयोग ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि मतगणना की पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित, पारदर्शी और पूरी तरह सुरक्षित तरीके से संपन्न होगी।


