Abu Dhabi News: मध्य पूर्व में बड़ा कूटनीतिक और रक्षा बदलाव दिखा है। इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अपनी सेना उतार दी है। यह कदम ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाने के लिए उठाया गया है। पहली बार किसी अरब देश में इजरायल ने अपना ‘आयरन बीम’ तैनात किया है। इसके साथ ही ‘आयरन डोम’ भी भेजा गया है। साल 2020 के अब्राहम समझौते के बाद यह सबसे बड़ा सैन्य सहयोग है।
इजरायल ने यूएई को दिया पूरा रक्षा कवच
ईरान ने यूएई पर हाल ही में करीब 500 बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे थे। इस भयानक खतरे को देखते हुए इजरायल ने तुरंत अपने मित्र देश की मदद की। इजरायल ने यूएई को ‘आयरन बीम’, ‘आयरन डोम’ और ‘स्पेक्ट्रो सिस्टम’ जैसी प्रणालियां दी हैं। स्पेक्ट्रो सिस्टम रडार 20 किलोमीटर दूर से ही ईरानी ‘शाहेद’ ड्रोन की पहचान कर लेता है। यह शक्तिशाली सिस्टम छोटे से छोटे ड्रोन को भी मार गिराने में पूरी तरह सक्षम है।
मैदान में उतारे गए प्रोटोटाइप हथियार
युद्ध के गंभीर हालातों को देखते हुए इजरायल ने अपने हथियार यूएई भेज दिए हैं। ये हथियार अभी केवल ‘प्रोटोटाइप’ चरण में थे। इनमें से कुछ हथियार इजरायल के मुख्य रडार नेटवर्क से पूरी तरह जुड़े भी नहीं थे। इसके बावजूद रक्षा मंत्रालय ने तुरंत इन्हें युद्ध के मैदान में उतारने का फैसला किया। ‘आयरन बीम’ एक बहुत आधुनिक और हाई-एनर्जी लेजर हथियार है। यह हथियार रॉकेट और खतरनाक ड्रोन को हवा में कुछ सेकंड के भीतर जला देता है।
इजरायली सैनिकों की पहली बार अरब में तैनाती
इस ऐतिहासिक रक्षा समझौते में इजरायली सैनिकों की तैनाती सबसे चौंकाने वाला कदम है। इजरायल ने आधुनिक रक्षा प्रणालियों को संचालित करने के लिए अपने दर्जनों सैन्य कर्मी भेजे हैं। यह पहली बार है जब इजरायली सैनिक इतनी बड़ी संख्या में किसी खाड़ी देश में मौजूद हैं। इजरायल लगातार पश्चिमी ईरान से होने वाले मिसाइल हमलों की रियल-टाइम खुफिया जानकारी भी साझा कर रहा है। इससे यूएई की सरकार को अपनी रक्षा करने में बहुत बड़ी मदद मिल रही है।
ईरान के खिलाफ बना साझा रक्षा मोर्चा
अरब देशों और इजरायल के बीच दशकों तक भारी दुश्मनी रही है। लेकिन एक मुस्लिम देश को संवेदनशील रक्षा तकनीक देना बड़ा बदलाव है। यह दर्शाता है कि इजरायल अब यूएई को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार मानता है। इस कदम से दुश्मन ईरान को एक स्पष्ट संदेश गया है। अब खाड़ी के अरब देश और इजरायल साझा दुश्मन के खिलाफ एक मोर्चे पर खड़े हैं। यह घटनाक्रम मध्य पूर्व की राजनीति में नया अध्याय जोड़ता है।
सस्ते ईरानी ड्रोन का मिला किफायती तोड़
युद्ध में इस्तेमाल होने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों की कीमत करोड़ों रुपये होती है। वहीं ईरान सस्ते ड्रोन का उपयोग करके यूएई पर हमले कर रहा था। ऐसे में महंगे हथियारों से सस्ते ड्रोन मारना घाटे का सौदा था। लेकिन इजरायल के लेजर आधारित ‘आयरन बीम’ ने यह समस्या सुलझा दी है। इस लेजर सिस्टम का प्रति-फायर खर्च न के बराबर होता है। इसलिए यह सिस्टम ईरानी ड्रोन हमलों को नाकाम करने का सबसे किफायती तोड़ बन गया है।


