दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना: अब खेत से थाली तक नहीं सड़ेगा अन्न, किसानों की चमकेगी किस्मत!

New Delhi News: भारत आज दुनिया के शीर्ष दस खाद्य उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन रिकॉर्ड 311 MMT उत्पादन के बावजूद भंडारण की भारी कमी एक बड़ा संकट बनी हुई है। वर्तमान में देश में उत्पादन और भंडारण क्षमता के बीच लगभग 47 प्रतिशत का बड़ा अंतर है। इस समस्या को खत्म करने के लिए भारत सरकार ने सहकारी क्षेत्र में ‘विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना’ शुरू की है। यह योजना प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के माध्यम से खेती की पूरी सप्लाई चेन को बदलने का एक ऐतिहासिक महा-अभियान है।

भंडारण की कमी और किसानों का आर्थिक नुकसान

भारत में हर साल अपर्याप्त सुविधाओं के कारण हजारों करोड़ का अनाज मंडियों तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो जाता है। वर्तमान में भारत की कुल भंडारण क्षमता लगभग 145 MMT है, जबकि खाद्यान्न उत्पादन 311 MMT को पार कर चुका है। वैज्ञानिक भंडारण के अभाव में लगभग 6.58 प्रतिशत खाद्यान्न नष्ट हो जाता है, जिससे देश को सालाना 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होता है। उचित स्थान न होने से किसान अक्सर ‘मजबूरी में बिक्री’ (Distress Sale) का शिकार होते हैं और बिचौलियों को कम दाम पर फसल बेच देते हैं।

PACS बनेंगे आधुनिक भंडारण केंद्र: गांव में ही मिलेगी सुरक्षा

सरकार की ‘सहकार से समृद्धि’ परिकल्पना के तहत अब PACS को आधुनिक भंडारण केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस विकेंद्रीकृत प्रणाली से किसानों को अपनी उपज दूर के शहरों में ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी। अब हर ब्लॉक और पंचायत स्तर पर ही अत्याधुनिक गोदाम उपलब्ध होंगे। ये गोदाम सहकारी समितियों द्वारा संचालित होंगे, जिससे निजी गोदामों की तुलना में भंडारण काफी सस्ता और सुलभ होगा। स्थानीय भंडारण से राशन दुकानों (PDS) तक अनाज पहुंचाना भी आसान और किफायती हो जाएगा।

NABARD की रणनीतिक भागीदारी और वित्तीय सहायता

इस विशाल योजना के क्रियान्वयन में NABARD एक महत्वपूर्ण भागीदार की भूमिका निभा रहा है। NABARD अपनी ‘विशेष पुनर्वित्त योजना’ के माध्यम से PACS को बेहद सस्ती दरों पर धन उपलब्ध करा रहा है। ‘कृषि अवसंरचना कोष’ (AIF) के साथ जुड़ने पर ब्याज दर में 3 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलती है, जिससे PACS के लिए प्रभावी ब्याज दर मात्र 1 प्रतिशत रह जाती है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 11 राज्यों में सफलतापूर्वक 9,750 मीट्रिक टन की भंडारण क्षमता पहले ही विकसित की जा चुकी है।

खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम

इस योजना का विस्तार अब 500 से अधिक अतिरिक्त पैक्स (PACS) तक किया जा रहा है। सरकार ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण अपनाते हुए विभिन्न योजनाओं को एक साथ जोड़कर वित्तीय सहायता दे रही है। इन केंद्रों को केवल भंडारण तक सीमित न रखकर खरीद केंद्र और प्रसंस्करण इकाइयों के रूप में भी सशक्त बनाया जा रहा है। यह क्रांतिकारी कदम न केवल परिवहन लागत बचाएगा, बल्कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के लॉजिस्टिक्स खर्च में भी करोड़ों की बचत करेगा, जिससे अंततः किसान सशक्त होगा।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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