Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकम्पा नियुक्ति मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आवेदन के समय बेटी का अविवाहित होना पर्याप्त है। बाद में शादी करने पर उसे अयोग्य नहीं माना जाएगा। नियुक्ति के समय महिला की वैवाहिक स्थिति आवेदन की तारीख से ही तय होगी। यह फैसला उन युवतियों के लिए बड़ी राहत है, जिन्हें अनुचित सरकारी नियमों के कारण अपनी पक्की नौकरी से हमेशा के लिए वंचित कर दिया जाता था।
शादी के कारण नौकरी से निकालना गलत
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की इस अनुचित नीति को खारिज कर दिया है। पुरानी नीति के अनुसार नियुक्ति के समय विवाहित होने पर बेटी को नौकरी नहीं मिलती थी। अदालत ने कहा कि किसी भी बेटी से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वह नियुक्ति का सालों तक इंतजार करे। इस लंबी अवधि में उसे शादी करने से रोकना गलत है। विभाग द्वारा नौकरी की पेशकश मिलने तक उसे नियमों के तहत अविवाहित ही माना जाना चाहिए।
श्यामा कुमारी को मिला न्याय का हक
यह मामला श्यामा कुमारी नामक याचिकाकर्ता से जुड़ा है। श्यामा ने पिता के निधन के बाद जून दो हजार इक्कीस में नौकरी का आवेदन किया था। अगले ही महीने जुलाई में उनकी शादी हो गई। सरकार ने उन्हें सितंबर दो हजार बाईस में चपरासी के पद पर नियुक्ति दी। जब उन्होंने मातृत्व अवकाश मांगा, तो विभाग ने शादी की बात कहकर नौकरी से निकाल दिया। अदालत ने इस विभागीय कदम को पूरी तरह से मनमाना और अन्यायपूर्ण करार दिया है।
नौकरी और सभी भत्ते देने का आदेश
अदालत ने श्यामा कुमारी को परिस्थितियों का शिकार माना है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को तत्काल प्रभाव से नौकरी पर वापस लिया जाए। उनकी नियुक्ति अगस्त दो हजार बाईस के मूल पत्र के आधार पर मानी जाएगी। अदालत ने उन्हें वरिष्ठता और सभी रुके हुए आर्थिक लाभ देने का स्पष्ट आदेश दिया है। यह अहम फैसला भविष्य में महिलाओं के कानूनी अधिकारों की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
