Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी को लोकतंत्र को दबाने का प्रयास करार दिया। सुक्खू ने कहा कि यह एफआईआर मुख्य विपक्षी दल के नेता को डराने और चुप कराने की कोशिश है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस पार्टी इस तरह की किसी भी रणनीति से भयभीत नहीं है। पूरी पार्टी खरगे के साथ एकजुटता के साथ खड़ी है और किसी बहाने पीछे नहीं हटेगी।
PM को आतंकवादी कहने के आरोप में BJP ने कराई FIR
गौरतलब है कि भाजपा की हिमाचल प्रदेश इकाई ने बृहस्पतिवार को धर्मशाला पुलिस थाने में मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप है कि खरगे ने 21 अप्रैल को चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए कथित रूप से आतंकवादी शब्द का इस्तेमाल किया। भाजपा के प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी विश्वचक्षु ने शिकायत में कहा कि इस आपत्तिजनक भाषा से 140 करोड़ देशवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सुक्खू बोले- ये विरोध सिर्फ राजनीतिक अवसरवाद है
मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा के विरोध प्रदर्शनों पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा राजस्व घाटा अनुदान बंद होने पर चुप रही। उन्होंने सवाल किया कि जब 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित हुआ तब उसे अमल में क्यों नहीं लाया गया। सुक्खू ने कहा कि भाजपा अब जनता को गुमराह करने के लिए आंदोलन कर रही है। उनका इशारा था कि ये प्रदर्शन हिमाचल के हितों के विपरीत केवल सियासी फायदे के लिए किए जा रहे हैं।
प्राकृतिक आपदा और सहायता पैकेज पर भी भाजपा चुप
सुक्खू ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जब हिमाचल प्रदेश विनाशकारी आपदाओं की चपेट में आया तो भाजपा नेताओं ने आवाज नहीं उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये के विशेष सहायता पैकेज को जारी करवाने की मांग को लेकर भी भाजपा ने कोई सार्थक प्रदर्शन नहीं किया। सीएम ने कहा कि यह दोहरा रवैया भाजपा के हिमाचल विरोधी चेहरे को बेनकाब करता है।
अराजकता फैलाने की आशंका पर पुलिस जांच जारी
भाजपा ने अपनी शिकायत में दलील दी कि खरगे का यह बयान समाज में नफरत और वैमनस्य फैलाने वाला है। पार्टी का कहना है कि इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान से देश में अराजकता और कानून-व्यवस्था के बिगड़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसे देखते हुए ही कड़ी कानूनी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और राजनीतिक गलियारों में इसकी जोरदार चर्चा है।
