मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट: ईरान को घेरने के लिए अमेरिका ने तैनात किए 3 एयरक्राफ्ट कैरियर, 23 साल बाद दिखा इतना आक्रामक रुख

Washington News: पश्चिम एशिया के अशांत क्षेत्रों में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां अमेरिका ने ईरान के साथ शांति वार्ता की चर्चाओं के बीच अपनी सैन्य ताकत का जबरदस्त प्रदर्शन किया है। अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े ने आधिकारिक पुष्टि की है कि मध्य पूर्व में अब एक साथ तीन परमाणु संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए जा चुके हैं। सामरिक जानकारों के अनुसार, पिछले 23 वर्षों में यह पहला मौका है जब इस इलाके में अमेरिकी युद्धपोतों की इतनी बड़ी संख्या देखी गई है। यह घटनाक्रम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ युद्ध समाप्ति की किसी भी निश्चित समयसीमा को बताने से साफ इनकार कर दिया था।

USS जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश की हुई एंट्री

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी है कि निमित्ज-क्लास का अत्याधुनिक युद्धपोत ‘USS जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश’ अब जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में पहुंच चुका है। साल 2009 में नौसेना में शामिल किया गया यह बेड़े का सबसे आधुनिक और घातक एयरक्राफ्ट कैरियर माना जाता है। लगभग 1,000 फीट की लंबाई और 1 लाख टन से अधिक वजन वाला यह तैरता हुआ सैन्य अड्डा अपने साथ 80 से अधिक लड़ाकू विमान ले जाने की क्षमता रखता है। दो शक्तिशाली न्यूक्लियर रिएक्टरों से संचालित इस पोत पर 5,500 से अधिक नौसैनिक और एयर क्रू हर समय युद्ध के लिए तैयार रहते हैं।

शांति वार्ता से पहले तेहरान पर दबाव

नौसेना के रिटायर्ड कैप्टन कार्ल शूस्टर का मानना है कि तीसरे कैरियर की तैनाती ईरान के शासन पर मनोवैज्ञानिक और सामरिक दबाव बढ़ाने की एक सोची-समझी रणनीति है। यह कदम संकेत देता है कि यदि शांति वार्ता ट्रंप प्रशासन की शर्तों के अनुरूप नहीं रही, तो अमेरिका किसी भी समय कठोर सैन्य विकल्प चुन सकता है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, यदि मौजूदा संघर्ष विराम विफल होता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी ठिकानों को निशाना बनाने की विस्तृत योजनाएं पहले ही तैयार की जा चुकी हैं। अमेरिका की इस आक्रामक घेराबंदी ने पूरे वैश्विक तेल बाजार और कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों की रणनीति

अमेरिकी सेना ने ईरान के उन तेज हमलावर जहाजों और बारूदी सुरंग बिछाने वाले साधनों को नष्ट करने की तैयारी की है, जिनका उपयोग तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के लिए करता रहा है। रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स के पूर्व अधिकारी पीटर लेटन का कहना है कि USS जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश के विमान इस अभियान में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जमीनी लक्ष्यों के लिए पहले से तैनात A-10 हमलावर विमान अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं। इस घेराबंदी का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस शक्ति को पंगु बनाना है जिसके जरिए वह जलमार्गों पर नियंत्रण का दावा करता है।

F-35 विमानों से बढ़ी अमेरिका की मारक क्षमता

अरब सागर में पहले से ही ‘USS अब्राहम लिंकन’ तैनात है, जो युद्ध की शुरुआत से ही ईरान के दक्षिण में मोर्चा संभाले हुए है। तीसरे कैरियर ‘बुश’ के आने से अमेरिका को सबसे बड़ा फायदा उस पर मौजूद आधुनिक F-35 लड़ाकू विमानों का मिलेगा। शूस्टर के अनुसार, F-35 विमानों से लैस दो कैरियर का इस क्षेत्र में होना अमेरिका की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। 2003 में इराक युद्ध के दौरान ‘शॉक एंड ऑ’ हमलों के बाद यह पहली बार है जब अमेरिकी नौसेना ने इतनी भारी संख्या में जंगी जहाज और डिस्ट्रॉयर इस क्षेत्र में झोंक दिए हैं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories