International News: हवाई यात्रा के दौरान अक्सर यात्री अपने बोर्डिंग पास पर फ्लाइट नंबर और गेट की जानकारी देखते हैं। हालांकि, अगर आपके पास के कोने पर ‘SSSS’ लिखा है, तो आपकी यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदलने वाला है। इसका अर्थ ‘सेकेंडरी सिक्योरिटी स्क्रीनिंग सिलेक्शन’ है, जो मुख्य रूप से अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागू होता है। यह कोड संकेत देता है कि आपको सामान्य सुरक्षा जांच के अलावा एक बेहद सघन और विशेष जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा।
क्या है SSSS कोड और यह क्यों मिलता है?
विमानन सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए ‘सेकेंडरी सिक्योरिटी स्क्रीनिंग सिलेक्शन’ (SSSS) की प्रक्रिया अपनाई जाती है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह चयन पूरी तरह से स्वचालित और रैंडम कंप्यूटर एल्गोरिदम पर आधारित होता है। जिन यात्रियों के बोर्डिंग पास पर यह कोड छप जाता है, वे ऑनलाइन चेक-इन की सुविधा का लाभ नहीं उठा पाते हैं। उन्हें अनिवार्य रूप से एयरपोर्ट काउंटर पर जाकर ही अपना फिजिकल बोर्डिंग पास लेना पड़ता है, जो जांच का पहला संकेत है।
सघन शारीरिक तलाशी और सामान की अनपैकिंग
‘SSSS’ कोड वाले यात्रियों को सुरक्षा अधिकारी एक अलग क्षेत्र में ले जाते हैं। यहां उनकी ‘पैट डाउन सर्च’ की जाती है, जो सामान्य तलाशी से कहीं अधिक विस्तृत होती है। इस दौरान यात्री के पास मौजूद लैपटॉप, मोबाइल और टैबलेट जैसे सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को चालू करवाकर चेक किया जाता है। अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि ये उपकरण वास्तव में कार्यशील हैं और इनका उपयोग किसी संदिग्ध गतिविधि के लिए तो नहीं किया जा रहा है।
विस्फोटक जांच और सामान की सूक्ष्म निगरानी
सुरक्षा जांच के दौरान ‘इम्प्लोसिव ट्रेस डिटेक्शन टेस्ट’ एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें यात्री के हाथों, जूतों और बैग पर एक विशेष स्वाब फेरा जाता है ताकि नैनो स्तर पर विस्फोटक के अंश पहचाने जा सकें। इसके अलावा, यात्री के हैंड बैग को पूरी तरह खाली करवाकर एक-एक वस्तु की जांच की जाती है। अधिकारी देखते हैं कि बैग में कोई गुप्त कोना या अवैध सामान तो नहीं छिपा है। यह प्रक्रिया काफी समय ले सकती है।
रैंडम सिलेक्शन और चयन के संभावित आधार
एजेंसियां भले ही इसे रैंडम कहती हैं, लेकिन विशेषज्ञों के कुछ अलग तर्क हैं। वन-वे टिकट बुक करने वाले, आखिरी समय में यात्रा तय करने वाले या उच्च जोखिम वाले देशों की यात्रा करने वाले लोग अक्सर इस रडार पर आ जाते हैं। इसके पीछे का मकसद किसी यात्री को परेशान करना नहीं, बल्कि सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियां इस डेटा को साझा करती हैं ताकि विमानन क्षेत्र को आतंकी गतिविधियों से सुरक्षित रखा जा सके।
बोर्डिंग पास पर स्टैंप और समय का प्रबंधन
पूरी जांच प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद ही अधिकारी बोर्डिंग पास पर एक विशेष स्टैंप लगाते हैं। इस क्लियरेंस स्टैंप के बिना किसी भी यात्री को विमान में सवार होने की अनुमति नहीं मिलती है। गेट पर तैनात कर्मचारी इस निशान को बारीकी से देखते हैं। यदि आपके पास पर यह कोड है, तो आपको कम से कम 45 मिनट का अतिरिक्त समय लेकर एयरपोर्ट पहुंचना चाहिए, ताकि सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण आपकी फ्लाइट न छूटे।
