Himachal News: हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर के पर्यावरण विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने हाल ही में एनआईटी हमीरपुर के सेंटर फॉर एनर्जी स्टडीज का शैक्षिक भ्रमण किया। इस दौरे का मुख्य आकर्षण शैवाल यानी एल्गी से बायोफ्यूल बनाने की आधुनिक प्रक्रिया को करीब से समझना रहा। साथ ही विद्यार्थियों ने सोलर ऊर्जा, रिन्यूएबल एनर्जी और कंप्यूटेशनल सिमुलेशन लैब की कार्यप्रणाली का बारीक निरीक्षण भी किया।
शैवाल से बनेगा भविष्य का स्वच्छ ईंधन
विद्यार्थियों ने जाना कि सूक्ष्म शैवाल को नियंत्रित परिस्थितियों में कैसे उगाया जाता है और उनसे उच्च गुणवत्ता वाला जैव ईंधन कैसे निकाला जाता है। एनआईटी के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह तकनीक वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड सोखने में भी सक्षम है। डॉ एन एस ठाकुर और उनकी टीम ने अपनी चल रही परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर चर्चा की। यह जानकारी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए अत्यंत मूल्यवान साबित हुई।
आधुनिक प्रयोगशालाओं का किया गहन निरीक्षण
सेंटर फॉर एनर्जी स्टडीज की उन्नत प्रयोगशालाओं ने छात्रों को आकर्षित किया। उन्होंने बायोफ्यूल उत्पादन इकाई के अलावा कंप्यूटेशनल मॉडलिंग लैब और अत्याधुनिक सोलर एनर्जी टेस्टिंग सेंटर का विस्तृत अवलोकन किया। पीएचडी शोधार्थियों ने अपने शोध कार्यों को सरल तरीके से समझाया और छात्रों के सवालों के जवाब भी दिए। डॉ ममता अवस्थी ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में करियर की अपार संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक अनुभव
शैक्षिक भ्रमण के बाद छात्रों में भारी उत्साह देखा गया। पर्यावरण विज्ञान विभाग की प्राध्यापिका डॉ वैष्णव किरण ने कहा कि प्रैक्टिकल एक्सपोजर के बिना थ्योरी अधूरी रहती है। उन्होंने बताया कि यह दौरा छात्रों के लिए वास्तविक अनुसंधान को समझने का अनूठा मंच बना। इससे उन्हें सतत ऊर्जा उत्पादन के नए आयामों को जानने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।
