Himachal Pradesh News: शिमला जिले के रोहड़ू में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां अस्पताल के पास देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजाने से मरीजों की जान सांसत में पड़ गई। स्थानीय निवासी सुरेन्द्र पापटा ने पुलिस उप अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपी है। उन्होंने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह घटना अस्पताल में भर्ती मरीजों, नवजात शिशुओं और बुजुर्गों के लिए भारी परेशानी का बड़ा कारण बनी है।
हाईकोर्ट के आदेशों की उड़ी धज्जियां
बीती 23 अप्रैल को रात ग्यारह बजे तक यह शोरगुल वाला कार्यक्रम चलता रहा। उच्च न्यायालय और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के अनुसार रात दस बजे के बाद लाउडस्पीकर बजाना सख्त मना है। इसके बावजूद अस्पताल और घनी आबादी वाले क्षेत्र में नियमों की खुलकर धज्जियां उड़ाई गईं। तेज संगीत के कारण गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भारी मानसिक तनाव झेलना पड़ा। यह सीधे तौर पर शांतिपूर्ण जीवन जीने के अधिकार का हनन है।
प्रशासन की नाक के नीचे होता रहा तमाशा
शिकायतकर्ता ने घटना के समय वहां मौजूद पत्रकारों और अधिकारियों की भूमिका पर भी भारी हैरानी जताई है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडियाकर्मियों ने भी इस स्पष्ट नियम उल्लंघन पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में यह सब होता रहा और किसी ने इसे नहीं रोका। यह प्रशासनिक लापरवाही का एक बहुत बड़ा उदाहरण है। आम जनता अब इन तमाम जिम्मेदार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी पर तीखे और गंभीर सवाल पूछ रही है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
रात के समय कानून व्यवस्था बनाए रखना और ध्वनि प्रदूषण रोकना स्थानीय पुलिस का मुख्य दायित्व है। पुलिस प्रशासन को ऐसे मामलों में तुरंत प्रभाव से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए थी। शिकायत में मांग की गई है कि आयोजकों के साथ-साथ मूकदर्शक बने अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई हो। पुलिस स्तर पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस लापरवाही ने पुलिस की गश्त और निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है।
दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग
सुरेन्द्र पापटा ने पुलिस अधिकारी से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच की जोरदार मांग की है। उन्होंने कहा है कि केवल आयोजकों पर ही नहीं बल्कि लापरवाही बरतने वाले सभी जिम्मेदारों पर शिकंजा कसा जाना चाहिए। रात के समय शांति व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाना बेहद जरूरी है। अब देखना यह है कि रोहड़ू पुलिस इस गंभीर शिकायत पर कितनी जल्दी संज्ञान लेती है और अस्पताल के मरीजों को कैसे न्याय दिलाती है।
