हिमाचल में भीषण गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड, ऊना में पारा 40 डिग्री पार; 25 अप्रैल से बारिश की उम्मीद, येलो अलर्ट जारी

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में गर्मी ने अब अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। मैदानी इलाकों के साथ-साथ मध्यम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तापमान तेजी से बढ़ रहा है। शुक्रवार (24 अप्रैल) को प्रदेश के कई हिस्सों में पारा सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया। हालांकि, 25 अप्रैल से मौसम में बदलाव के आसार हैं। मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश और आंधी-तूफान का येलो अलर्ट जारी किया है।

ऊना में 40 डिग्री, कांगड़ा-धर्मशाला भी झुलसे

प्रदेश में सबसे अधिक गर्मी ऊना में पड़ रही है। यहां अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 4.1 डिग्री अधिक है। ऊना का अप्रैल माह का रिकॉर्ड तापमान 30 अप्रैल 2022 को 43.2 डिग्री दर्ज किया गया था। कांगड़ा में पारा 36.4 डिग्री, धर्मशाला में 33.0 डिग्री और कुल्लू के भुंतर में 33.4 डिग्री सेल्सियस रहा। यह सभी सामान्य से काफी ऊपर हैं। लोग दोपहर में घरों से निकलने को तरस रहे हैं, क्योंकि निचले इलाकों में लू जैसे हालात बन गए हैं।

शिमला-मनाली में भी असहनीय गर्मी, मौसम ने बदला मिजाज

गर्मी का असर अब पहाड़ी शहरों में भी साफ दिखने लगा है। शिमला में अधिकतम तापमान 27.2 डिग्री और मनाली में 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से कई डिग्री अधिक है। पर्यटकों को भी गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है। पिछले एक सप्ताह से लगातार तेज धूप खिलने के कारण ऊना, कांगड़ा, मंडी, बिलासपुर, हमीरपुर और सिरमौर जिलों के निचले इलाकों में हालात बेहाल करने वाले हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह गर्मी असामान्य है और इसका बड़ा कारण स्थानीय मौसमी सिस्टम में बदलाव है।

25 अप्रैल से राहत के आसार, कई जिलों में येलो अलर्ट

राहत की खबर यह है कि एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है। इसका असर अगले चार दिनों तक प्रदेश में देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने शनिवार (25 अप्रैल) को पूरे प्रदेश में बारिश की संभावना जताई है। चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिलों में आंधी-तूफान को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। 26 अप्रैल को कांगड़ा और कुल्लू में मौसम खराब रहने की चेतावनी दी गई है। बारिश होने से तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। किसानों के लिए यह राहत भरी खबर है, क्योंकि फसलों को पानी की जरूरत है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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