Himachal News: हिमाचल के लाहौल-स्पीति की गोद में बसा हिक्किम गांव अपनी खूबसूरती के साथ-साथ एक अनोखी पहचान रखता है। यहां दुनिया का सबसे ऊंचा कार्यरत डाकघर (World Highest Post Office) मौजूद है। समुद्र तल से करीब 4,440 मीटर की ऊंचाई पर बना यह डाकघर साल 1983 से इस दूरदराज इलाके को दुनिया से जोड़ रहा है। डाकिया यहां बादलों को चीरकर लोगों तक संदेश पहुंचाता है।
नेटवर्क की ‘नो-एंट्री’ पर चिट्ठियों की चलती है हुकूमत
हिक्किम की दुनिया बड़ी निराली है। यहां 5G इंटरनेट के सिग्नल काम नहीं आते और न ही मोबाइल की घंटियां अक्सर बजती हैं। यहां के करीब 150 से 600 लोग आज भी अपनी खुशियों और गमों का संदेश भेजने के लिए इसी डाकघर पर निर्भर हैं। जब चारों तरफ सन्नाटा और बर्फ की चादर होती है, तब पिन कोड 172114 वाला यह ठिकाना ही बाहरी दुनिया से संपर्क का एकमात्र जरिया बनता है। यह पोस्ट ऑफिस सादगी और धैर्य की मिसाल है।
सैलानियों के लिए जन्नत और यादों का खजाना
हिक्किम सिर्फ गांव वालों के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि स्पीति आने वाले हर मुसाफिर की बकेट लिस्ट में शामिल है। पर्यटक यहां आकर कोमिक और लैंग्जा जैसे ऊंचे गांवों की सैर करते हैं। फिर वे खास तौर पर हिक्किम पोस्ट ऑफिस से अपने अपनों को पोस्टकार्ड भेजते हैं। भारी बर्फबारी में कामकाज थम जाता है, लेकिन सूरज की पहली किरणों के साथ ही डाकिया ‘बाबू’ फिर से ड्यूटी पर मुस्तैद हो जाते हैं। बादलों के ऊपर से आई उस चिट्ठी की बात ही कुछ और होती है।
डिजिटल दौर में हिक्किम की सादगी हमें क्या सिखाती है?
आज की डिजिटल भागदौड़ में हिक्किम का यह पोस्ट ऑफिस हमें पुराने दिनों की सादगी और सब्र की याद दिलाता है। यहां धीमी गति से चलने वाला संचार भी उतना ही प्रभावी है। जब बर्फ पिघलती है, तो हिक्किम डाकघर के माध्यम से हजारों पोस्टकार्ड और पत्र दुनिया भर में भेजे जाते हैं। अगर आप भी स्पीति घाटी की सैर पर जा रहे हैं, तो यहां से एक खत अपने घर जरूर भेजिएगा। यह डाकघर भारतीय डाक सेवा की पहुंच और दृढ़ संकल्प का जीता-जागता प्रमाण है।
