Mandi News: 24 अप्रैल 1997 को मंडी-कुल्लू मार्ग पर बिंदरावणी में स्थापित हिमाचल दर्शन फोटो गैलरी अपने संघर्षों के बावजूद 30वें साल में प्रवेश कर रही है। पुरातत्व चेतना संघ ने इसे हिमाचल की संस्कृति, इतिहास, कला और जनजीवन को एक जगह दिखाने के उद्देश्य से शुरू किया था। लेकिन दो बार फोरलेन सड़क परियोजना की भेंट चढ़ने के कारण इसे उजड़ना पड़ा। पिछले एक साल से यह बल्ह घाटी के मलोरी में अस्थायी परिसर में चल रही है। इसके बावजूद शोधार्थियों और दर्शकों का आना जारी है।
पांच लाख दर्शकों ने देखी गैलरी, कई बार हटानी पड़ी
संस्थापक छायाकार बीरबल शर्मा ने बताया कि अब तक देश-विदेश से पांच लाख से अधिक लोग इस गैलरी को देख चुके हैं। यहां एक संग्रहालय और पुस्तकालय भी स्थापित किया गया है। वर्ष 2016 के बाद इस गैलरी को कई बार हटाना और फिर से स्थापित करना पड़ा। विपरीत परिस्थितियों और बढ़ती उम्र (70 वर्ष) के चलते कई बार इसे बंद करने का मन बनाया। लेकिन दर्शकों के उत्साहवर्धक व्यवहार और गैलरी की जरूरत को देखते हुए इसे जारी रखने का निर्णय लिया गया। उनकी टिप्पणियों ने हौसला बढ़ाया।
मई में नए पुरातात्विक स्वरूप में खुलेगी गैलरी
अब उम्मीद जगी है कि मई महीने में यह गैलरी एक नए और शानदार पुरातात्विक स्वरूप में देखने को मिलेगी। नया परिसर सुकेती नदी के किनारे मलोरी-बैहना की खूबसूरत वादियों में एक खुले स्थान पर तैयार किया जा रहा है। बिंदरावणी वाला पुराना परिसर, जिसमें प्राचीन हटली के बरसेले थे, जून 2025 में जिला प्रशासन को सौंप दिया गया था। नई गैलरी में संग्रह को पहले से अधिक विस्तार देने की योजना है। इससे शोधार्थियों को एक ही जगह अधिक जानकारी मिलेगी।
शुभचिंतकों के सहयोग से जिंदा है हिमाचल दर्शन
बीरबल शर्मा ने बताया कि बार-बार उजड़ने के बावजूद गैलरी का बने रहना मंडी के लोगों, शुभचिंतकों, शोधार्थियों और मीडिया के साथियों के सहयोग से ही संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि वह जीवन भर सभी सहयोगियों के आभारी रहेंगे। हिमाचल दर्शन गैलरी आज भी हिमाचली संस्कृति और इतिहास को संजोए हुए है। यह सिर्फ एक फोटो गैलरी नहीं, बल्कि प्रदेश की धरोहर को समेटे रखने का एक अनूठा प्रयास है। अब इसके नए रूप में फिर से जन्म लेने का इंतजार है।
