वाराणसी में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही: एक्सपायरी से पहले ही कूड़े में फेंक दीं लाखों की एमडीआर टीबी दवाएं

Uttar Pradesh News: वाराणसी के सेवापुरी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में सरकारी संसाधनों की बर्बादी का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के पुराने भवन के पास भारी मात्रा में टीबी की कीमती दवाएं लावारिस हालत में फेंकी हुई मिली हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन दवाओं की एक्सपायरी डेट साल 2027 दर्ज है। यानी जो दवाएं अभी तीन साल तक मरीजों की जान बचा सकती थीं, उन्हें जानबूझकर कचरे में फेंक दिया गया।

महंगी एमडीआर दवाओं की बेरहमी से बर्बादी

फेंकी गई दवाओं में आइसोनियाजिड, लिंजोलीड और पैराडाक्सिन जैसी महत्वपूर्ण टेबलेट्स शामिल हैं। ये दवाएं ‘मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट’ (MDR) टीबी के मरीजों के लिए संजीवनी मानी जाती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, लिंजोलीड एमडीआर के नए शॉर्ट कोर्स की ग्रुप-ए श्रेणी की दवा है, जो काफी महंगी आती है। वहीं पैराडाक्सिन मरीजों को नसों की गंभीर समस्याओं से बचाने के लिए दी जाती है। इन दवाओं का इस तरह फेंकना सरकारी धन और मरीजों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ है।

अस्पताल प्रशासन ने साधी चुप्पी

इस गंभीर लापरवाही पर जब सेवापुरी पीएचसी के प्रभारी डॉ. अमित कुमार सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने मामले से पूरी तरह अनभिज्ञता जताई। अस्पताल के टीबी सुपरवाइजर माधव कृष्ण मालवी ने भी इसी तरह का पल्ला झाड़ने वाला जवाब दिया। स्थानीय निवासी रमेश ने बताया कि एक तरफ गरीब मरीज दवा के लिए अस्पताल के चक्कर काटते रहते हैं और उन्हें स्टॉक न होने का बहाना बनाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी दवाओं को बाहर फेंक रहे हैं।

नियमित ड्यूटी से नदारद रहते हैं कर्मचारी

जांच में यह भी सामने आया है कि दवा वितरण के लिए जिम्मेदार कर्मचारी अक्सर अपनी ड्यूटी से गायब रहते हैं। इस कारण अस्पताल के भीतर आपसी विवाद की स्थिति बनी रहती है। मरीजों का आरोप है कि कर्मचारी अपनी लापरवाही छिपाने के लिए स्टॉक को रजिस्टर में खपा देते हैं और दवाओं को ठिकाने लगा देते हैं। एक पीड़ित मरीज ने आक्रोश जताते हुए कहा कि हमें दवा के लिए बार-बार दौड़ाया जाता है, लेकिन यहाँ दवाएं जमीन पर सड़ रही हैं।

दोषियों पर गिरेगी कार्रवाई की गाज

वाराणसी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. राजेश प्रसाद ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अपर निदेशक डॉ. एनडी शर्मा ने स्पष्ट किया है कि दवाओं की बर्बादी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की गहराई से जांच कराकर दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह घटना जिले की स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली और स्टॉक मॉनिटरिंग पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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