Himachal News: धर्मशाला के समीप मनूनी खड्ड में पिछले साल बादल फटने से आई बाढ़ में मारे गए जलविद्युत परियोजना के मजदूरों के परिवारों को अब मुआवजा मिलेगा। इस मामले में न्यायालय ने कड़ा संज्ञान लिया। न्यायाधीश के आदेश के बाद परियोजना निर्माण में जुटी कंपनी ने कोर्ट में 1.22 करोड़ रुपये जमा करवा दिए हैं। यह राशि अब पीड़ित परिवारों को प्रदान की जाएगी।
बाढ़ में आठ मजदूरों की गई थी जान
यह हादसा 25 जून 2025 को हुआ था। ऊपरी क्षेत्र में बादल फटने से मनूनी खड्ड पर बन रही जलविद्युत परियोजना के आठ कर्मचारियों की मौत हो गई थी। यह परियोजना इंदिरा प्रियदर्शिनी हाइड्रो पावर प्राइवेट लिमिटेड बना रही थी। घटना दोपहर तीन से रात आठ बजे के बीच घटी। मृतक मजदूर अलग-अलग राज्यों से थे। इस दर्दनाक हादसे ने उनके परिवारों को तबाह कर दिया था। अब करीब एक साल बाद उन्हें मुआवजे की उम्मीद जगी है।
कोर्ट ने कंपनी को दिए थे सख्त निर्देश
प्रकरण में नियोक्ता ने पहले दुर्घटना की सूचना तो दे दी थी, लेकिन मुआवजा राशि जमा नहीं की थी। कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के तहत यह अनिवार्य है। इस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए तत्काल अनुपालना के निर्देश जारी किए। आयुक्त धर्मशाला सह वरिष्ठ दीवानी न्यायाधीश हकीकत ढांडा के न्यायालय के आदेश के बाद कंपनी ने 1,22,41,950 रुपये की मुआवजा राशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करवा दी। यह राशि अब मृतकों के आश्रितों को बांटी जाएगी।
पीड़ित परिवारों को कैसे मिलेगा मुआवजा?
न्यायालय ने मुआवजा वितरण प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। कोर्ट ने आदेश की प्रतियां जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) कांगड़ा, चंबा, डोडा और देवरिया को भेजने का निर्देश दिया है। ताकि ये प्राधिकरण पीड़ित परिवारों को राशि वितरण में सहायता कर सकें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आश्रित चाहें तो मुआवजा राशि को उनके संबंधित जिलों के अधिकार क्षेत्र में स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे भुगतान प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और सरल हो जाएगी। यह निर्णय पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत है।
