Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों की सुगबुगाहट के बीच मंडी जिला से भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। गोहर ब्लॉक की दाण पंचायत में एक पूर्व महिला वार्ड सदस्य पर मनरेगा के नियमों की धज्जियां उड़ाने के संगीन आरोप लगे हैं। राज्य सरकार द्वारा जनवरी 2026 में पंचायतों को बर्खास्त करने के बावजूद, यहाँ पुरानी शक्तियों का दुरुपयोग जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पंचायत विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी रिकॉर्ड में हाजिरी और निजी खेत में काम
दाण पंचायत में 24 अप्रैल 2026 को मनरेगा के तहत मजदूरों की हाजिरी लगाई गई थी। हालांकि, वायरल वीडियो में एक बुजुर्ग महिला मजदूर ने खुलासा किया कि उनसे पूर्व वार्ड सदस्य के निजी खेतों में काम करवाया जा रहा है। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों से भी इस बात की पुष्टि की है। हैरानी की बात यह है कि पूर्व वार्ड सदस्य ने मास्टर रोल में अपनी उपस्थिति भी दर्ज करवाई है, लेकिन वह कार्यस्थल से पूरी तरह नदारद पाई गईं।
सामग्री की हेराफेरी और ग्रामीणों के गंभीर आरोप
भ्रष्टाचार का यह खेल केवल हाजिरी तक ही सीमित नहीं है। ग्रामीणों द्वारा साझा किए गए एक अन्य वीडियो में पूर्व वार्ड सदस्य सरकारी क्रेट वॉल की सुरक्षा तारें अपने घर ले जाती दिख रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सदस्य ने 115 बैग सरकारी सीमेंट भी अपने कब्जे में छिपा रखा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शिकायत करने पर उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। इससे स्पष्ट होता है कि नियमों को ठेंगा दिखाने के पीछे किसी राजनीतिक संरक्षण का हाथ है।
प्रशासनिक चुप्पी और सरकारी दिशा-निर्देशों की अवहेलना
पंचायतों की बर्खास्तगी के बाद सरकार ने विकास कार्यों के लिए महिला और युवक मंडलों की कमेटियां गठित करने का प्रावधान किया था। इसके बावजूद, दाण पंचायत में पुरानी व्यवस्था का बोलबाला है। जब इस संबंध में खंड विकास अधिकारी (BDO) से संपर्क किया गया, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था। उन्होंने वार्ड सदस्यों को ‘हाजिरी लगाने का एक्सपर्ट’ बताकर पल्ला झाड़ लिया। विभाग की यह चुप्पी अनपढ़ और असहाय मजदूरों के शोषण को बढ़ावा दे रही है, जिससे जनता में रोष व्याप्त है।
जांच की मांग और पंचायती राज चुनावों पर असर
इस मामले के उजागर होने के बाद अब उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा से पहले इस तरह के घोटाले चुनावी पारदर्शिता पर दाग लगा रहे हैं। वायरल वीडियो के साक्ष्य मिलने के बाद भी कार्रवाई न होना प्रशासन की मंशा पर संदेह पैदा करता है। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। अब देखना होगा कि पंचायत विभाग इस धांधली पर क्या कदम उठाता है।
