Kathmandu: नेपाल सरकार ने प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अभिभावकों से मिली कई शिकायतों के बाद शिक्षा मंत्रालय ने चेतावनी जारी की है कि तय सीमा से अधिक फीस वसूलने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई होगी। शिकायतों में आरोप लगा कि एकेडमिक सेशन खत्म होने और नए सत्र की शुरुआत के बीच स्कूल मनमाने ढंग से फीस उगाही कर रहे हैं। अब सरकार ने इस पर लगाम कसने का फैसला किया है।
सत्र शुरू होने से पहले ही एडमिशन और भारी वसूली
द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय के पास ऐसे ठोस सबूत पहुंचे हैं जो बताते हैं कि कुछ स्कूल 2026 के एकेडमिक सेशन की आधिकारिक शुरुआत से पहले ही छात्रों का एडमिशन ले रहे थे। इस दौरान उनसे भारी मात्रा में फीस वसूली जा रही थी। मंत्रालय ने इसे नियमों का सरासर उल्लंघन मानते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया है।
2015 के फीस मानदंड का सख्ती से पालन करने का आदेश
मंत्रालय ने सभी प्राइवेट स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि वे छात्रों का एडमिशन एकेडमिक साल शुरू होने के बाद ही करें। इसके साथ ही ‘प्राइवेट स्कूल फीस निर्धारण मानदंड निर्देश, 2015’ का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। इन निर्देशों की अनदेखी करने वाले संस्थानों को कानूनी परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
फीस वापसी और जुर्माने की कार्रवाई शामिल
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियमों के उल्लंघन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त फीस को तुरंत वापस करना शामिल है। स्थानीय सरकारों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे सुनिश्चित करें कि सभी स्कूल इन नियमों का ईमानदारी से पालन कर रहे हैं और कोई ढिलाई न बरती जाए।
14 श्रेणियों में तय है फीस की सीमा
इस निर्देश के तहत स्कूलों को केवल 14 श्रेणियों में ही फीस लेने की अनुमति है। इनमें ट्यूशन, एडमिशन, परीक्षा और ट्रांसपोर्टेशन जैसे मद शामिल हैं लेकिन हर श्रेणी की एक निश्चित सीमा तय कर दी गई है। ट्यूशन फीस केवल 12 महीनों के लिए ली जा सकती है। एडमिशन फीस एक महीने की ट्यूशन फीस से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और इसे सिर्फ एक बार ही वसूला जा सकता है।
25,000 रुपये जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान
मनमानी करने वाले स्कूलों पर 25,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। यही नहीं, अगर कोई स्कूल बार-बार नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है तो उसका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। यह सख्त कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के एक अंतरिम आदेश के बाद की गई है जिसमें स्कूलों को एकेडमिक कैलेंडर और एडमिशन की उचित प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया था।
दिल्ली में भी अभिभावक सड़कों पर उतरे
भारत में भी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस को लेकर चिंता बढ़ रही है। दिल्ली में हाल ही में अभिभावकों ने पूर्वी दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि स्कूल फीस विवादों को लेकर बच्चों के रिपोर्ट कार्ड रोक रहा है और स्कूल से निकालने जैसी जबरदस्ती वाली हरकतें कर रहा है। अभिभावकों ने केवल अधिकारियों द्वारा मंजूर फीस देने की जिद पकड़ी।
दो साल में 57 फीसदी बढ़ोतरी का मामला आया सामने
प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों ने दावा किया कि पिछले दो सालों में स्कूल ने फीस में लगभग 57 फीसदी की बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी है। उन्होंने साफ कहा कि वे केवल उन्हीं शुल्कों का भुगतान करेंगे जिन्हें प्रशासन ने मंजूरी दी है। यह मामला प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ बढ़ते आक्रोश को दर्शाता है।
दिल्ली सरकार का नया कानून और कोर्ट की रोक
नीतिगत स्तर पर दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 2025’ का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद करीब 1,700 प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ोतरी पर नियंत्रण लगाना है। हालांकि इसके कार्यान्वयन को 2026-27 के शैक्षणिक सत्र तक टाल दिया गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल उन प्रावधानों पर रोक लगा दी है जिनके तहत स्कूलों को शुल्क विनियमन समितियां गठित करना अनिवार्य था।
