International News: अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बहुत बढ़ गया है। खाड़ी में तीसरा अमेरिकी युद्धपोत पहुंच चुका है। इससे दोनों देशों के बीच महायुद्ध का खतरा मंडरा रहा है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अचानक तीन देशों की यात्रा पर निकले हैं। उनकी यात्रा का पहला पड़ाव पाकिस्तान है। इसके बाद वह ओमान और रूस भी जाएंगे। अराघची का यह कूटनीतिक दौरा शांति वार्ता के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस्लामाबाद में होगी शांति वार्ता की रूपरेखा तैयार
विदेश मंत्री अराघची के साथ एक छोटा प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा है। वहां वे पहले से मौजूद अमेरिकी लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा टीम के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में दोनों देश शांति वार्ता की रूपरेखा तय करेंगे। एक उच्चस्तरीय अमेरिकी दल भी शनिवार रात तक इस्लामाबाद पहुंचने वाला है। अराघची ने यात्रा से पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसहाक डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से बातचीत की। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और युद्धविराम पर गहन विचार किया है।
अमेरिका की ईरान को स्पष्ट चेतावनी
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अराघची के दौरे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईरान के पास समझौता करने का एक बहुत अच्छा मौका है। इसके लिए ईरान को केवल अपने परमाणु हथियार छोड़ने होंगे। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। अमेरिकी सेंटकॉम ने हाल ही में ईरान के दो जहाजों को रोका है। ये जहाज छिपकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर रहे थे।
ईरान का अड़तालीस घंटे का अल्टीमेटम
ईरान ने अमेरिका के सामने अपनी कड़ी शर्तें रखी हैं। अब्बास अराघची ने अमेरिका से फ्रीज की गई ग्यारह खरब डॉलर की संपत्ति को जारी करने की मांग की है। उन्होंने अमेरिका को इसके लिए अड़तालीस घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। अराघची ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी न होने पर मौजूदा युद्धविराम टूट जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि संपत्ति जारी होने तक होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद रहेगा। बीते चौबीस घंटे में सिर्फ पांच जहाज गुजरे हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप पर बढ़ रहा है भारी दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर युद्ध जारी रखने का भारी दबाव है। संविधान के अनुसार किसी भी युद्ध के लिए संसद की मंजूरी जरूरी है। राष्ट्रपति ट्रंप के पास संसद से मंजूरी लेने के लिए केवल छह दिन बचे हैं। उन्होंने अठाइस फरवरी को शुरू युद्ध की सूचना दो मार्च को दी थी। एक मई को साठ दिनों की समय सीमा खत्म हो रही है। रिपब्लिकन पार्टी के लगभग दस सांसद इस युद्ध के विरोध में आवाज उठा चुके हैं।
संसद में राष्ट्रपति ट्रंप की स्थिति कमजोर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध को लेकर संसद में राष्ट्रपति ट्रंप की स्थिति काफी कमजोर है। सौ सदस्यों वाली सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के तिरेपन सांसद हैं। वहीं विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के पास सैंतालीस सदस्य हैं। ऐसे में बिल पास कराना बहुत ही मुश्किल काम है। ट्रंप के पास सिर्फ एक ही आखिरी विकल्प बचा है। वह सैनिकों की सुरक्षित वापसी के लिए तीस दिन का अतिरिक्त समय मांग सकते हैं। यह अतिरिक्त समय युद्ध के लिए नहीं मिलेगा।
खाड़ी में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत बहुत ज्यादा बढ़ा दी है। अमेरिका ने वहां अपना तीसरा शक्तिशाली विमानवाहक पोत भी तैनात कर दिया है। साल दो हजार तीन के बाद यह अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा है। इस बड़ी तैनाती में लगभग दो सौ खतरनाक लड़ाकू विमान शामिल हैं। इसके साथ ही कई युद्धपोत और हजारों नौसैनिक भी वहां पूरी तरह मुस्तैद हैं। यह ईरान के लिए एक बहुत ही स्पष्ट संदेश है।
विभिन्न देशों में फंसी है ईरान की भारी रकम
ईरान पर कई सालों से बेहद कड़ी आर्थिक पाबंदियां लगी हुई हैं। इन भारी प्रतिबंधों के कारण ईरान की बड़ी रकम विदेशों में फंसी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न देशों में ईरान की पचास से सौ अरब डॉलर की रकम जब्त है। यह पैसा ईरानी तेल और गैस के निर्यात के बदले मिलना था। ईरान ने शांति समझौते के लिए इस जब्त रकम को तुरंत जारी करने की शर्त रखी है। यह आर्थिक विवाद गहराता जा रहा है।
