Miami News: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी हलचल के बीच वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा मोड़ आने वाला है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल दिसंबर में अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण के बाद क्रेमलिन ने संकेत दिया है कि पुतिन मियामी में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं। यह यात्रा यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच संवाद बहाली का सबसे बड़ा अवसर बन सकती है।
व्हाइट हाउस का औपचारिक निमंत्रण और क्रेमलिन की रणनीति
अमेरिका इस वर्ष G20 देशों की वार्षिक बैठक की मेजबानी कर रहा है। प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर रूस को इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया है। मॉस्को ने इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है, जिससे वैश्विक राजनीति में सुगबुगाहट तेज हो गई है। हालांकि, पुतिन की व्यक्तिगत उपस्थिति पर अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है। रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति पुतिन खुद मियामी जा सकते हैं या किसी वरिष्ठ प्रतिनिधि को भेज सकते हैं।
ट्रंप का स्टैंड: G8 से रूस को बाहर करना एक बड़ी चूक
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रूस की वापसी का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने हालिया बयान में रूस को G8 समूह से बाहर करने के फैसले को एक ऐतिहासिक गलती करार दिया। ट्रंप का मानना है कि वैश्विक संकटों और युद्ध की स्थितियों को केवल सीधी बातचीत के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि पुतिन की भागीदारी से यूक्रेन संकट और मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने के लिए एक साझा जमीन तैयार की जा सकती है।
G7 की प्रासंगिकता पर रूस का बड़ा और कड़ा हमला
रूस के उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर पैनकिन ने पुष्टि की है कि रूस को उच्च स्तरीय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया है। दूसरी ओर, क्रेमलिन ने पश्चिम के प्रभुत्व वाले G7 समूह को अब पूरी तरह से बेकार और अप्रासंगिक मंच करार दिया है। रूस के अनुसार, वर्तमान वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य में G20 ही एकमात्र ऐसा मंच है जहां उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की आवाज सुनी जाती है। पुतिन का मियामी जाना पश्चिमी प्रतिबंधों के प्रभाव को कूटनीतिक रूप से चुनौती देने जैसा होगा।
यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार अमेरिका की धरती पर पुतिन?
व्लादिमीर पुतिन ने आखिरी बार साल 2019 में G20 शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा लिया था। इसके बाद कोरोना महामारी और 2022 में यूक्रेन पर सैन्य हमले के कारण उनके विदेशी दौरे काफी सीमित हो गए थे। विशेष रूप से पश्चिमी देशों के साथ उनके संबंधों में आई कड़वाहट ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों से दूर कर दिया था। अगर पुतिन मियामी पहुंचते हैं, तो यह 2022 के बाद किसी भी पश्चिमी देश, विशेषकर अमेरिका की उनकी पहली और सबसे चर्चित यात्रा होने वाली है।
वैश्विक संकटों के बीच G20 शिखर सम्मेलन का बढ़ता महत्व
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही पुतिन को इस शिखर सम्मेलन का हिस्सा बनाना चाहते थे। हालांकि, आधिकारिक तौर पर निमंत्रण की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरणों में है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस वर्तमान में उभरते वैश्विक संकटों के मद्देनजर G20 को बेहद महत्वपूर्ण मानता है। मियामी में होने वाली यह बैठक न केवल व्यापार और अर्थव्यवस्था, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और शांति के दृष्टिकोण से भी दुनिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटना साबित हो सकती है।
