New Delhi News: आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा जब दिग्गज नेता राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने अचानक पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इस दलबदल से नाराज होकर संजय सिंह ने राज्यसभा के सभापति से इन तीनों सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करने का फैसला किया है। संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि बीजेपी में शामिल होना संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के समान है और वे इसके खिलाफ औपचारिक प्रक्रिया शुरू करेंगे।
संविधान की 10वीं अनुसूची और अयोग्यता का खेल
संजय सिंह ने घोषणा की है कि वह जल्द ही राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी को एक पत्र सौंपेंगे। इस पत्र के माध्यम से मांग की जाएगी कि राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक की सदस्यता रद्द की जाए। आप नेता का तर्क है कि जब कोई सांसद अपनी मूल पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होता है, तो वह सदन में रहने का कानूनी अधिकार खो देता है। पार्टी अब संविधान के प्रावधानों का सहारा लेकर इन नेताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के मूड में है।
क्या है दल-बदल विरोधी कानून और इसके कड़े प्रावधान?
भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची, जिसे 1985 में जोड़ा गया था, राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए बनाई गई है। इस कानून के तहत यदि कोई निर्वाचित सदस्य स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है या पार्टी व्हिप का उल्लंघन करता है, तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है। हालांकि, इसमें एक अपवाद भी है। यदि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सदस्य एक साथ किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो उन पर अयोग्यता का यह नियम लागू नहीं होता है।
राघव चड्ढा के गंभीर आरोप और ‘ऑपरेशन लोटस’ की चर्चा
बीजेपी मुख्यालय में शामिल होने के दौरान राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने 15 साल दिए, वह अब अपनी मूल विचारधारा और सिद्धांतों से पूरी तरह भटक गई है। चड्ढा के अनुसार, पार्टी अब राष्ट्रहित के बजाय निजी लाभ के लिए काम कर रही है। वहीं, संजय सिंह और मनीष सिसोदिया ने इन नेताओं को ‘पंजाब का गद्दार’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने ‘ऑपरेशन लोटस’ के जरिए डरा-धमकाकर यह खेल रचा है।
अरविंद केजरीवाल की चुप्पी और सियासी भविष्य
इस पूरे घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने अपनी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बीजेपी ने एक बार फिर पंजाब के लोगों के साथ धोखा किया है। गौरतलब है कि राघव चड्ढा को हाल ही में राज्यसभा में उपनेता के पद से भी हटा दिया गया था, जिसके बाद से उनके और पार्टी के बीच दूरियां बढ़ती जा रही थीं। अब इस कानूनी लड़ाई का नतीजा तय करेगा कि इन सांसदों की कुर्सी बचेगी या जाएगी।
