New Delhi News: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का विजन साझा किया है। उन्होंने वाशिंगटन की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। गोर ने हाल ही में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक को बेहद सकारात्मक बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक सहयोग पहले से कहीं अधिक मजबूत होगा।
2026 के सेलेक्ट-यूएसए समिट पर टिकीं दुनिया की नजरें
अमेरिकी राजदूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने अनुभव साझा करते हुए भारतीय दल के साथ बिताई शाम को शानदार बताया। उन्होंने 2026 में होने वाले ‘SelectUSA Summit’ के महत्व पर जोर दिया, जो वैश्विक निवेश को आकर्षित करने का एक बड़ा मंच है। सर्जियो गोर के अनुसार, अमेरिका एक निष्पक्ष और संतुलित व्यापार ढांचे पर काम कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य आपसी लाभ सुनिश्चित करना और दोनों देशों के आर्थिक विकास की गति को और तेज करना है।
प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ेगा भारी निवेश
सर्जियो गोर का मानना है कि इस बढ़ते सहयोग से अमेरिका में भारतीय निवेश का प्रवाह काफी बढ़ेगा। इससे न केवल व्यापारिक रिश्ते सुधरेंगे, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों के लिए साझा समृद्धि के द्वार भी खुलेंगे। वर्तमान में भारत और अमेरिका प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और सेवा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपने जुड़ाव को लगातार विस्तार दे रहे हैं। रणनीतिक साझेदारी के इस दौर में आर्थिक एकीकरण दोनों देशों की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर बना हुआ है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़ा है वाशिंगटन
आर्थिक चर्चाओं के बीच राजदूत सर्जियो गोर ने सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर भी भारत को अपना पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने पहलगाम में हुए कायराना हमले की बरसी पर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। गोर ने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद के खिलाफ इस वैश्विक लड़ाई में अमेरिका पूरी मजबूती के साथ भारत के साथ खड़ा है। उनके इस बयान ने राजनयिक गलियारों में दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और एकजुटता का संदेश दिया है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए साझा कार्ययोजना
SelectUSA Summit को लेकर राजदूत ने बताया कि यह कार्यक्रम अमेरिका में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा देने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में कार्य करता है। भारत के साथ द्विपक्षीय निवेश चर्चाओं को आगे बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर व्यापार 500 अरब डॉलर के आंकड़े को छूता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के समीकरण बदल देगा। दोनों पक्ष अब जमीनी स्तर पर नीतियों को लागू करने में जुटे हैं।
