New Delhi News: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लेते हुए पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग लाइसेंस आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब पेटीएम पेमेंट्स बैंक किसी भी प्रकार की बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए अधिकृत नहीं रहेगा। आरबीआई ने यह कदम नियामकीय मानकों के लगातार उल्लंघन और बैंक के कामकाज में गंभीर खामियों के चलते उठाया है। इस फैसले ने देश के फिनटेक और डिजिटल बैंकिंग क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है।
जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए उठाया सख्त कदम
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया है कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बिजनेस मॉडल जमाकर्ताओं के हितों के लिए बेहद जोखिम भरा साबित हो रहा था। बैंक प्रबंधन पर आरोप है कि वे पेमेंट्स बैंक लाइसेंस के लिए निर्धारित बुनियादी नियमों का पालन करने में पूरी तरह नाकाम रहे। आरबीआई अब इस बैंक की व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगा। केंद्रीय बैंक ने आश्वासन दिया है कि ग्राहकों की जमा राशि सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
इन धाराओं के उल्लंघन ने बिगाड़ा पेटीएम का खेल
आरबीआई की जांच में पाया गया कि बैंक का कामकाज बैंकिंग विनियमन अधिनियम (BR Act) की कई महत्वपूर्ण धाराओं के खिलाफ था। बैंक की कार्यप्रणाली धारा 22 (3)(b) के प्रावधानों के विपरीत पाई गई, जो ग्राहकों के हितों के लिए हानिकारक मानी जाती है। इसके अलावा, बैंक का मैनेजमेंट स्ट्रक्चर सार्वजनिक हित और जमाकर्ताओं की सुरक्षा के अनुरूप नहीं था, जिसे धारा 22 (3)(c) का सीधा उल्लंघन माना गया है। नियमों की इस अनदेखी ने केंद्रीय बैंक को लाइसेंस रद्द करने जैसा कठोर कदम उठाने पर मजबूर किया।
मैनेजमेंट पर उठे सवाल और भविष्य की योजना
आरबीआई ने बैंक के प्रबंधन ढांचे पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि बैंक को मौजूदा स्वरूप में जारी रखना जनहित में नहीं होगा। रिपोर्ट के अनुसार, पेटीएम पेमेंट्स बैंक लाइसेंस से जुड़ी अनिवार्य शर्तों को पूरा करने में विफल रहा, जिससे धारा 22 (3)(g) का उल्लंघन हुआ। हालांकि, राहत की बात यह है कि आरबीआई ने पुष्टि की है कि बैंक के पास अपनी वर्तमान जमा देनदारियों को चुकाने के लिए पर्याप्त नकदी (Liquidity) मौजूद है। गौरतलब है कि बैंक पर मार्च 2022 से ही नए ग्राहक जोड़ने पर प्रतिबंध लगा हुआ था।
डिजिटल इकोनॉमी और यूपीआई की बढ़ती रफ्तार
पेटीएम पर हुई इस कार्रवाई के बीच भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और यूपीआई (UPI) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। वित्त मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में होने वाले कुल भुगतानों में यूपीआई की हिस्सेदारी अब 57% हो गई है। बर्नस्टीन की ग्लोबल रिपोर्ट तो यहां तक बताती है कि कैशलेस ट्रांजैक्शन की संख्या के मामले में यूपीआई ने 90% बाजार पर कब्जा कर लिया है। पेटीएम के लाइसेंस रद्द होने के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई का मजबूत ढांचा डिजिटल लेनदेन की गति को प्रभावित नहीं होने देगा।
