Delhi News: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पुष्टि की है कि राज्यसभा के 73 विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा महासचिव को एक नया और औपचारिक नोटिस सौंपा है। इस नोटिस में राष्ट्रपति से संवैधानिक प्रावधानों के तहत हस्तक्षेप करने की अपील की गई है। विपक्ष का तर्क है कि ‘सिद्ध दुराचरण’ के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से मुक्त किया जाना लोकतंत्र की गरिमा के लिए अनिवार्य है।
विपक्ष के 9 गंभीर आरोप और संवैधानिक चुनौती
कांग्रेस नेता जयराम रमेश के मुताबिक, इस नए नोटिस में 15 मार्च 2026 के बाद की घटनाओं को आधार बनाया गया है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नौ विशिष्ट आरोप शामिल किए गए हैं, जिनमें कथित प्रशासनिक चूक और पक्षपातपूर्ण व्यवहार का जिक्र है। विपक्षी खेमे का मानना है कि वर्तमान नेतृत्व में चुनाव आयोग की निष्पक्षता खतरे में है। उनका आरोप है कि आयोग स्वतंत्र रूप से कार्य करने के बजाय सत्ता पक्ष के एजेंडे को प्राथमिकता दे रहा है, जो संविधान की मूल भावना का उल्लंघन है।
पुराना नोटिस खारिज होने के बाद नई रणनीति
यह राजनीतिक घटनाक्रम तब सामने आया है जब इसी तरह का एक पिछला प्रयास विफल हो चुका है। इससे पहले 12 मार्च को भी दोनों सदनों में प्रस्ताव का नोटिस दिया गया था, जिसे 6 अप्रैल को लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने तकनीकी आधार पर अस्वीकार कर दिया था। उस समय पीठासीन अधिकारियों ने कहा था कि नोटिस में लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। हालांकि, इस बार विपक्ष ने अधिक संख्या बल और नए तथ्यों के साथ अपनी घेराबंदी मजबूत की है।
क्या हैं मुख्य आरोप और आगे की राह?
विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार पर नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और चुनावी गड़बड़ियों की जांच में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी और आयोग की स्वतंत्रता को बनाए रखने में विफलता को भी मुद्दा बनाया गया है। तकनीकी रूप से राज्यसभा में 50 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है, जबकि वर्तमान नोटिस पर 73 हस्ताक्षर हैं। अब सबकी नजरें राज्यसभा सचिवालय पर टिकी हैं कि क्या इस बार यह नोटिस चर्चा के लिए स्वीकार किया जाता है या नहीं।
