India News: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई राज्यों में भीषण लू का अलर्ट जारी किया है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली से लेकर बिहार और विदर्भ तक पारा आसमान छू रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह भयानक गर्मी सिर्फ सेहत को नुकसान नहीं पहुंचा रही है। यह हमारी अर्थव्यवस्था को गहराई से खोखला कर रही है। काम के घंटे घट रहे हैं और अस्पतालों के भारी भरकम बिल आम आदमी की कमर तोड़ रहे हैं।
अर्थव्यवस्था पर लू की भारी मार
भारत में लगातार बढ़ती गर्मी अब एक गंभीर आर्थिक संकट बन चुकी है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक अत्यधिक गर्मी से देश को करीब 159 बिलियन डॉलर की उत्पादकता का नुकसान हुआ है। यह भारत की कुल आय का लगभग 5.4 प्रतिशत हिस्सा है। हर साल 160 बिलियन से अधिक काम के घंटे पूरी तरह बर्बाद हो रहे हैं। मजदूर भीषण गर्मी में अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं।
GDP को हो रहा है बड़ा नुकसान
इस दशक के अंत तक लू भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा आघात पहुंचा सकती है। ऊर्जा और पर्यावरण परिषद (CEEW) के विश्लेषण के अनुसार, 2030 तक गर्मी के तनाव से देश की GDP में 4.5 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। अगर जल्द ही ठोस नीतियां नहीं बनाई गईं, तो इस सदी के मध्य तक यह नुकसान 8.7 प्रतिशत तक जा सकता है। सबसे ज्यादा असर खुले में काम करने वाले मजदूरों पर पड़ रहा है।
मजदूरों की कमाई पर सीधा असर
कृषि, निर्माण और असंगठित क्षेत्र के मजदूर इस गर्मी का सबसे बड़ा खामियाजा भुगत रहे हैं। तेज धूप के कारण दिन के सबसे गर्म घंटों में इन्हें काम रोकना पड़ता है। इससे उनकी दिहाड़ी और कमाई तेजी से घट जाती है। साल 2024 में ही भीषण गर्मी के कारण करीब 247 अरब श्रम घंटों का भारी नुकसान हुआ था। इससे देश को 194 अरब डॉलर का जबरदस्त आर्थिक घाटा सहना पड़ा था।
अस्पतालों के बिलों ने बढ़ाई मुसीबत
गर्मी के कारण हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मेडिकल इमरजेंसी में गंभीर हीटस्ट्रोक के इलाज का खर्च दो लाख रुपये तक पहुंच जाता है। यह रकम एक आम कामकाजी परिवार की पूरी बचत खत्म कर देती है। चालीस प्रतिशत शहरी और साठ प्रतिशत ग्रामीण परिवार ऐसे बिल चुकाने के लिए भारी कर्ज लेने को मजबूर हैं। कई लोगों को अपनी पुश्तैनी संपत्ति तक बेचनी पड़ जाती है।
खाद्य सुरक्षा पर मंडराता बड़ा खतरा
मेडिकल बिलों के भारी बोझ के साथ-साथ यह गर्मी खाद्य सुरक्षा को भी बड़े खतरे में डाल रही है। भयंकर लू के कारण प्रमुख नदियों के बेसिन तेजी से सूख रहे हैं। इससे गेहूं और चावल जैसी प्रमुख फसलों का उत्पादन तेजी से गिर रहा है। मंडियों में उत्पादन कम होने से खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छूने लगे हैं। बढ़ती महंगाई सीधे तौर पर आम इंसान की खर्च करने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करती है।
नई नीतियों की तत्काल आवश्यकता
विशेषज्ञ इस राष्ट्रीय संकट से निपटने के लिए बहुस्तरीय सार्वजनिक नीतियों की तत्काल मांग कर रहे हैं। हीट एक्शन प्लान को मजबूत कानूनी ढांचा देने की सख्त जरूरत है। मजदूरों के लिए काम के घंटों में बदलाव किया जाए। हर कार्यस्थल पर कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अनिवार्य किया जाए। असंगठित मजदूरों को विशेष स्वास्थ्य बीमा कवर मिले। लू को अब सिर्फ मौसमी घटना मानकर नजरअंदाज करना देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद घातक साबित होगा।
