Kolkata News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण ने भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है। शुक्रवार को चुनाव आयोग द्वारा जारी संशोधित आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में मतदान का प्रतिशत न केवल अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, बल्कि इसने 2021 के सभी पुराने रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिए हैं। यह उछाल तब देखने को मिला है जब ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया के कारण मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए गए थे।
24 लाख अधिक लोगों ने किया मताधिकार का प्रयोग
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि 16 जिलों की 152 सीटों पर इस बार लगभग 3.35 करोड़ मतदाताओं ने वोट डाला। साल 2021 के चुनावों में इन्हीं सीटों पर 3.1 करोड़ वोट पड़े थे। यानी इस बार करीब 24 लाख अतिरिक्त लोगों ने वोटिंग में हिस्सा लिया। चौंकाने वाली बात यह है कि SIR प्रक्रिया के बाद इन सीटों पर कुल मतदाताओं की संख्या में 18 लाख की कमी आई थी, फिर भी वोटों की कुल संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई।
कूच बिहार और दिनाजपुर में 95% के पार पहुंची वोटिंग
चुनाव आयोग के अपडेट के मुताबिक, 16 में से 14 जिलों में मतदान का प्रतिशत 90% से अधिक रहा। कूच बिहार जिला 96% वोटिंग के साथ पूरे राज्य में अव्वल रहा। अन्य जिलों की स्थिति भी इसी प्रकार रही:
- दक्षिण दिनाजपुर: 95.4%
- जलपाईगुड़ी: 94.6%
- बीरभूम: 94.5%
- मालदा: 94.4%
- मुर्शिदाबाद: 93.6%
प्रवासी मजदूरों की घर वापसी ने बदला समीकरण
वोटिंग प्रतिशत में इस भारी बढ़ोतरी के पीछे एक बड़ा कारण प्रवासी मजदूरों की घर वापसी मानी जा रही है। मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर बंगाल के अन्य जिलों से बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में मजदूरी करते हैं। इस बार वोट कटने के डर और राजनीतिक जागरूकता के कारण हजारों लोगों ने अपनी दिहाड़ी और सफर का खर्च उठाकर घर आकर वोट डाला। मतदाताओं में यह डर व्याप्त था कि यदि उन्होंने इस बार वोट नहीं दिया, तो SIR प्रक्रिया के तहत उनका नाम हमेशा के लिए लिस्ट से हट सकता है।
शीतलकुची और शमशेरगंज में दिखा जबरदस्त उत्साह
कूच बिहार के शीतलकुची में, जो 2021 की हिंसा के कारण चर्चा में रहा था, इस बार रिकॉर्ड 97.5% मतदान हुआ। यह पूरे राज्य में किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक है। इसी तरह मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज में भी 96.1% मतदान दर्ज किया गया। गौरतलब है कि शमशेरगंज में ही SIR के दौरान सबसे ज्यादा 91,712 नाम हटाए गए थे। ऐसा लगता है कि नामों के हटने की कार्रवाई ने ही लोगों को बूथों तक खींचने में ‘कैटेलिस्ट’ का काम किया।
सीईओ मनोज अग्रवाल का स्पष्टीकरण
बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से अनुपस्थित, स्थानांतरित, और मृत (ASDD) मतदाताओं को हटाने के कारण कुल मतदाताओं का आधार (Denominator) कम हो गया। इससे प्रतिशत में स्वाभाविक बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, चुनाव आयोग के शुक्रवार के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि प्रतिशत के अलावा वोट डालने वाले लोगों की वास्तविक संख्या (Absolute Number) में भी 2021 की तुलना में भारी इजाफा हुआ है।
मतदाता सूची की सफाई और लोकतंत्र की मजबूती
चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद मतदाता सूची पहले से कहीं अधिक ‘शुद्ध’ हुई है। जिन 91 लाख नामों को पूरे राज्य से हटाया गया, उनमें से अधिकतर डुप्लीकेट या अनुपस्थित वोटर थे। सूची की इस सफाई के बाद हुए पहले चरण के चुनाव ने यह साबित कर दिया कि बंगाल का मतदाता अपने अधिकारों के प्रति पहले से कहीं अधिक सजग है। अब सभी की निगाहें दूसरे चरण के मतदान पर टिकी हैं।
