Delhi News: आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शनिवार को अपने 15 साल पुराने राजनीतिक सफर पर विराम लगा दिया। उन्होंने छह अन्य सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस फैसले को अपने लिए बेहद कठिन लेकिन जरूरी बताते हुए चड्ढा ने आरोप लगाया कि AAP अपने भ्रष्टाचार विरोधी मूल सिद्धांतों से पूरी तरह भटक चुकी है। उन्होंने कहा कि पार्टी के अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहता।
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकली पार्टी अब समझौतों में फंसी
राघव चड्ढा ने बेबाकी से कहा कि जो पार्टी कभी स्वच्छ राजनीति और जवाबदेही का वादा लेकर बनी थी, वह अब उन्हीं आदर्शों से कोसों दूर जा चुकी है। उन्होंने कहा कि वे काफी समय से अंदर ही अंदर असहज महसूस कर रहे थे और लगता था कि वे गलत पार्टी में हैं। इसी वजह से उन्होंने जानबूझकर पार्टी की सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी। उनके मुताबिक पार्टी के मूल्य और नैतिक दिशा कमजोर पड़ चुके हैं।
भावुक हुए चड्ढा, बोले- युवावस्था और ऊर्जा इस आंदोलन को दे दी
पार्टी छोड़ने की घोषणा करते समय राघव चड्ढा भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे कीमती साल पार्टी को खड़ा करने और विस्तार देने में लगा दिए। वे दिल्ली, पंजाब और अन्य राज्यों में संगठन निर्माण के शुरुआती संस्थापक सदस्यों में से एक रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में करियर बनाने नहीं, बल्कि देश सेवा और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना लेकर आए थे।
मोदी के नेतृत्व और भारत की प्रगति को बताया BJP ज्वाइन करने का कारण
राघव चड्ढा ने अपने इस बड़े फैसले के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को प्रमुख वजह बताया। उन्होंने कहा कि भारत आज वैश्विक मंच पर पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्हें विश्वास है कि राष्ट्र निर्माण के लिए सार्थक योगदान देने का यही सही मंच है। उनके साथ शामिल होने वाले अन्य सांसदों में विश्वप्रसिद्ध क्रिकेटर, पद्मश्री सम्मानित हस्तियां और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक शामिल हैं।
हम जनता के लिए चुने गए, किसी पार्टी के लिए नहीं
राघव चड्ढा ने सवाल उठाया कि क्या पार्टी बदलने से जनता की सेवा का उनका संकल्प खत्म हो जाना चाहिए? खुद ही जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे आगे भी आम नागरिकों के मुद्दों, सुशासन, जवाबदेही और जनकल्याण के लिए लगातार आवाज बुलंद करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि AAP ने उन्हें जिम्मेदारियां दीं, और बदले में उन्होंने अपना सब कुछ पार्टी को दिया। लेकिन अब नैतिकता के आधार पर रास्ते अलग करना जरूरी हो गया था।
