₹3 का शेयर आज ₹317 के पार, 6 साल में ₹1 लाख को बना दिया ₹1.05 करोड़, जानिए किस कंपनी ने निवेशकों को बनाया मालामाल

Mumbai: शेयर बाजार में कुछ स्टॉक अपनी चाल से निवेशकों को हैरत में डाल देते हैं। ऐसा ही एक नाम है ट्रांसफार्मर्स एंड रेक्टिफायर्स इंडिया। इस मल्टीबैगर शेयर ने छह साल में निवेशकों की किस्मत बदल दी है। अप्रैल 2020 में महज ₹3 के भाव पर मिलने वाला यह स्टॉक आज NSE पर ₹317 के पार ट्रेड कर रहा है। एक लाख रुपये का निवेश अब 1.05 करोड़ रुपये की कीमत में तब्दील हो चुका है।

कंपनी का प्रदर्शन रहा शानदार

वित्त वर्ष 2026 में ट्रांसफार्मर्स एंड रेक्टिफायर्स का रेवेन्यू 23 फीसदी उछलकर 2,395 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कंपनी का शुद्ध मुनाफा यानी PAT ने 20 फीसदी की छलांग लगाई और 225 करोड़ रुपये को छू लिया। ऑपरेशनल एफिशिएंसी और सख्त लागत नियंत्रण ने मार्जिन को लगातार मजबूत बनाए रखा। 31 मार्च 2026 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 5,005 करोड़ रुपये की विशालकाय हो चुकी है।

लॉन्ग टर्म के साथ मीडियम टर्म में भी धमाल

इस शेयर ने न केवल लंबी अवधि बल्कि मध्यम अवधि में भी निवेशकों को निराश नहीं किया। पांच साल में इस मल्टीबैगर स्टॉक ने करीब 3,519.59 फीसदी का धमाकेदार रिटर्न दिया है। तीन साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो इसने निवेशकों का पैसा 871 फीसदी तक बढ़ा दिया। पिछले एक महीने में ही यह 18 फीसदी उछल चुका है, जो इसकी तेजी की रफ्तार को बयां करता है।

एक साल में 43% की गिरावट भी आई

हालांकि, हर वक्त चमकने वाला यह स्टॉक पिछले एक साल में 43 फीसदी तक लुढ़का भी है। इसका सीधा अर्थ है कि जिन निवेशकों ने एक साल पहले इसमें एक लाख रुपये लगाए थे, उनकी रकम अब घटकर महज 56,590 रुपये रह गई है। लेकिन जिन्होंने एक महीने पहले ही इसमें पैसा डाला, उनका एक लाख रुपया 1.18 लाख रुपये बन चुका है।

मजबूत निष्पादन क्षमता और बढ़ती तकनीक

कंपनी के लिए पिछला वित्त वर्ष स्थिरता और मजबूती का साल रहा है। प्रबंधन का कहना है कि मजबूत निष्पादन क्षमता और बढ़ती तकनीक की बदौलत मार्जिन में लगातार सुधार हो रहा है। ऑर्डर बुक का आंकड़ा 5,000 करोड़ के पार होना यह दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में भी कंपनी की विकास गाथा जारी रहने की पूरी उम्मीद है।

निवेशकों के लिए सीख और सावधानी

स्टॉक की यह कहानी निवेशकों को दो अहम सबक देती है। पहला, लॉन्ग टर्म निवेश का धैर्य किस तरह करोड़पति बना सकता है। दूसरा, शेयर बाजार में हर तेजी के बाद गिरावट भी उतनी ही स्वाभाविक है। एक साल में 43 फीसदी की गिरावट यह याद दिलाती है कि किसी भी स्टॉक में आंख मूंदकर पैसा लगाने से पहले पूरी रिसर्च और जोखिम की समझ जरूरी है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories