समुद्री चक्रव्यूह: होर्मुज और सुंडा स्ट्रेट को लेकर भारतीय नौसेना का बड़ा मास्टरप्लान, चीन की बढ़ेगी टेंशन

New Delhi News: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल के बीच भारतीय नौसेना ने अपनी नई समुद्री सुरक्षा रणनीति का खुलासा किया है। नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी द्वारा जारी इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में होर्मुज को ‘प्राइमरी एरिया ऑफ इंटरेस्ट’ यानी प्राथमिकता वाला क्षेत्र घोषित किया गया है। हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ती हलचल को देखते हुए नौसेना ने उन प्रमुख समुद्री चोक पॉइंट्स की पहचान की है, जो वैश्विक व्यापार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जीवन रेखा माने जाते हैं।

रणनीतिक चोक पॉइंट्स पर भारतीय नौसेना की पैनी नजर

भारतीय नौसेना की इस नई रणनीति के तहत हिंद महासागर के कई अहम रास्तों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। इनमें केप ऑफ गुड होप, मोजाम्बिक चैनल, बाब-एल-मंदेब और स्वेज नहर जैसे मार्ग शामिल हैं। नौसेना ने विशेष रूप से मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमध्य के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया है। ये मार्ग हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर और प्रशांत महासागर से जोड़ते हैं। फारस की खाड़ी से पूर्वी एशिया तक पहुंचने का यह सबसे छोटा और सुगम समुद्री रास्ता है, जिस पर भारतीय नौसेना अब अपनी निगरानी और बढ़ाएगी।

मलक्का का विकल्प: सुंडा स्ट्रेट और इसकी भौगोलिक चुनौतियां

नौसेना की रणनीति में सुंडा जलडमरूमध्य (Sunda Strait) का जिक्र सबसे अहम माना जा रहा है। सुमात्रा और जावा द्वीपों के बीच स्थित यह मार्ग मलक्का के विकल्प के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं हैं। लगभग 93 किलोमीटर लंबा यह रास्ता काफी उथला है और यहां की समुद्री धाराएं बेहद तेज हैं। इन नेविगेशन संबंधी जोखिमों के कारण बड़े जहाजों और भारी टैंकरों के लिए यहां से गुजरना चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि, छोटे युद्धपोतों और पनडुब्बियों के लिए यह सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है।

चीन की घेराबंदी और भारत का रणनीतिक ‘गेटवे’

भारत के लिए सुंडा स्ट्रेट का महत्व केवल आर्थिक नहीं बल्कि गहरा सामरिक भी है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती घुसपैठ को रोकने के लिए यह मार्ग एक ‘प्रहरी’ की तरह काम कर सकता है। सुंडा स्ट्रेट के जरिए भारतीय नौसेना न केवल पूर्वी एशिया तक अपनी पहुंच मजबूत कर सकती है, बल्कि ड्रैगन की हरकतों पर भी नजर रख सकती है। पूर्वी एशियाई देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर भारत इस मार्ग का इस्तेमाल चीन की घेराबंदी के लिए कर सकता है। इसके अलावा ओम्बाई और वेटार जलडमरूमध्य भी वैकल्पिक रास्तों के रूप में नौसेना के राडार पर हैं।

इतिहास और भूगोल के बीच उलझा सुंडा जलडमरूमध्य

सुंडा जलडमरूमध्य का इतिहास और भूगोल दोनों ही काफी जटिल रहे हैं। यह क्षेत्र 1883 के क्राकाटोआ ज्वालामुखी विस्फोट जैसी विनाशकारी घटनाओं का गवाह रहा है। सामरिक रूप से भी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहां मित्र देशों और जापानी सेनाओं के बीच भीषण जल युद्ध लड़ा गया था। इंडोनेशियाई सरकार ने जावा और सुमात्रा को जोड़ने के लिए यहां एक विशाल पुल बनाने की योजना बनाई थी, जिसे 2014 में सुरक्षा और भौगोलिक कारणों से स्थगित कर दिया गया। अब यह क्षेत्र पूरी तरह से समुद्री परिवहन और सामरिक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है।

ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर मंडराता खतरा

होर्मुज और मलक्का जैसे चोक पॉइंट्स पर किसी भी प्रकार की बाधा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकती है। ईरान-इजरायल युद्ध की स्थिति में अगर होर्मुज स्ट्रेट बाधित होता है, तो भारत समेत कई देशों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति संकट में पड़ सकती है। इसी खतरे को भांपते हुए भारतीय नौसेना ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। नौसेना का लक्ष्य इन समुद्री गलियारों में अपनी उपस्थिति को इतना मजबूत करना है कि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय हितों और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकाला जा सके।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories