भारतीय रेलवे का ‘ग्रीन ट्रैक मिशन’: अब बाढ़ और तूफान में भी नहीं उखड़ेगी रेल की पटरी

New Delhi News: भारतीय रेलवे ने प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए एक बेहद स्मार्ट और स्थायी समाधान खोज निकाला है। अब भारी बारिश, बाढ़ या साइक्लोन जैसी आपदाओं के दौरान रेलवे ट्रैक के बहने का डर खत्म हो जाएगा। रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण को बुनियादी ढांचे की सुरक्षा से जोड़ते हुए पटरियों के किनारे बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पेड़ों की जड़ों के जरिए मिट्टी को बांधना और ट्रैक को मजबूती प्रदान करना है, ताकि ट्रेन सेवाएं किसी भी मौसम में प्रभावित न हों।

रेल मंत्रालय की बड़ी पहल: रिकॉर्ड संख्या में लगाए गए पेड़

रेल मंत्रालय के एडीजी धर्मेंद्र तिवारी के अनुसार, पिछले साल ही सभी रेलवे जोनों में कुल 81.59 लाख पौधे लगाए गए हैं। इस विशाल अभियान में नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे, साउथ सेंट्रल रेलवे, नॉर्थ ईस्ट और नॉर्दर्न रेलवे जैसे प्रमुख जोन शामिल हैं। रेलवे ने न केवल ट्रैक के किनारे, बल्कि स्टेशनों और अपनी खाली पड़ी जमीनों पर भी सघन पौधारोपण किया है। इस हरियाली से रेलवे की संपत्तियों की सुरक्षा तो बढ़ी ही है, साथ ही रेलवे स्टेशनों का सौंदर्य भी निखरा है।

पेड़ों की जड़ें बनेंगी रेल की पटरियों का सुरक्षा कवच

विशेषज्ञों का मानना है कि पेड़ों की जड़ें मिट्टी को गहराई तक मजबूती से पकड़कर रखती हैं। मानसून या बाढ़ के दौरान जब पानी का तेज बहाव होता है, तो ये जड़ें मिट्टी के कटाव (Soil Erosion) को रोकती हैं। पहाड़ी और अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में यह तकनीक रामबाण साबित हो रही है। पहले इन इलाकों में भूस्खलन और ट्रैक धंसने की घटनाएं आम थीं, लेकिन अब वृक्षारोपण के कारण पटरियों के नीचे की जमीन स्थिर रहेगी, जिससे रेल हादसों की आशंका काफी कम हो जाएगी।

बाढ़ और चक्रवात से होने वाले पुराने नुकसान का सबक

भारतीय रेलवे को अतीत में प्राकृतिक आपदाओं के कारण भारी आर्थिक और परिचालन संबंधी नुकसान झेलना पड़ा है। साल 2017 में बिहार और असम में आई भीषण बाढ़ ने कई स्थानों पर पटरियों को उखाड़ दिया था, जिससे महीनों तक रेल संपर्क टूटा रहा। इसी तरह 2018 की केरल बाढ़ और तटीय इलाकों में आने वाले चक्रवातों ने रेलवे ट्रैक को काफी क्षति पहुंचाई थी। इन पुराने कड़वे अनुभवों से सबक लेते हुए ही रेलवे ने अब प्राकृतिक समाधान यानी ‘ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर’ पर भरोसा जताया है।

पर्यावरण और यात्रियों के लिए दोहरी खुशी का मौका

वृक्षारोपण अभियान के फायदे केवल ट्रैक की सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं। ये पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर रेलवे के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, ट्रैक के किनारे लगे पेड़ ट्रेनों से होने वाले शोर और धूल को भी कम करते हैं, जिससे यात्रियों को यात्रा के दौरान अधिक सुखद अनुभव मिलता है। यह मिशन पानी के बहाव को नियंत्रित करने और भूजल स्तर को सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

स्मार्ट समाधान: सुरक्षा और हरियाली का अनूठा संगम

भारतीय रेलवे का यह ‘ग्रीन ट्रैक मिशन’ दुनिया के सामने एक मिसाल पेश कर रहा है कि कैसे आधुनिक तकनीक के बिना भी प्रकृति की मदद से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। यह मिशन न केवल रेलवे को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है, बल्कि टिकाऊ विकास (Sustainable Development) के लक्ष्यों को भी पूरा कर रहा है। आने वाले वर्षों में, रेलवे की योजना इस अभियान को और अधिक विस्तार देने की है, ताकि देश का हर रेल रूट ‘डिजास्टर प्रूफ’ और हरा-भरा बन सके।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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