Delhi News: दिल्ली पुलिस ने एक्स-मुस्लिम यूट्यूबर सलीम वास्तिक को गिरफ्तार कर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। 31 साल पुराने अपहरण और हत्या के मामले में फरार चल रहे इस शख्स ने खुद को कानून की नजरों में मृत घोषित करवा दिया था। इसके बाद इस्लाम छोड़कर नई पहचान बनाई और सोशल मीडिया पर एक्टिविस्ट यूट्यूबर के तौर पर मशहूर हो गया। लेकिन पुलिस ने आखिरकार उसकी चालाकी की पोल खोल ही दी।
शामली से दिल्ली तक का सफर
आरोपी सलीम उत्तर प्रदेश के शामली जिले के नानूपुरा इलाके का रहने वाला है। उसने शामली में शाओलिन कुंग फू मार्शल आर्ट सीखा और फिर दिल्ली आ गया। यहां वह दरियागंज के रामजस स्कूल में मार्शल आर्ट कोच बन गया। इसके साथ ही उसने जैकेट सप्लाई का साइड बिजनेस भी शुरू कर दिया। मुस्तफाबाद से दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में जैकेट सप्लाई करते वक्त ही उसकी मुलाकात सह-आरोपी अनिल से हुई।
ऐसे रची गई 30 हजार की फिरौती की साजिश
अनिल शातिर दिमाग का था और उसने सलीम के साथ मिलकर पैसे कमाने के लिए अपराध का रास्ता चुन लिया। 20 जनवरी 1995 को दोनों ने उत्तर पूर्वी दिल्ली के एक कारोबारी के 13 वर्षीय बेटे का अपहरण कर लिया। बदमाशों ने कारोबारी को फोन कर 30 हजार रुपये की फिरौती मांगी और कहा कि पैसे लोनी फ्लाईओवर के पास बस स्टैंड पर लाकर बागपत जाने वाली बस में रख दो।
पड़ोसी के बयान ने खोला राज
परिवार ने पहले ही पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी थी और जांच शुरू हो गई थी। जांच के दौरान पुलिस को रामजस स्कूल के मार्शल आर्ट्स कोच सलीम खान पर शक हुआ। यह शक एक पड़ोसी के उस बयान की वजह से गहरा गया जिसमें उसने बच्चे को सलीम के साथ देखने की बात कही थी। पुलिस टीम तुरंत सलीम के घर पहुंची और उसे हिरासत में ले लिया।
नाले से मिली थी बच्चे की लाश
पूछताछ में सलीम ने पुलिस को गुमराह करने की बहुत कोशिश की लेकिन उसकी चालाकी ज्यादा देर नहीं टिक सकी। आखिरकार वह टूट गया और पुलिस को मुस्तफाबाद में भागीरथी वाटर पंप के पास एक गंदे नाले के पास ले गया। वहीं से बच्चे का शव बरामद किया गया। इस खुलासे के बाद पुलिस ने उसके साथी अनिल की तलाश तेज कर दी जो शुरू में फरार हो गया था।
साजिशकर्ता अनिल ने किया था आत्मसमर्पण
फरार चल रहे अनिल ने बाद में 4 फरवरी 1995 को अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने तलाशी के दौरान उसकी झुग्गी से मृतक बच्चे की घड़ी, टिफिन बॉक्स और स्कूल बैग बरामद किया। जांच में पता चला कि अनिल ही इस घटना का मुख्य साजिशकर्ता था। उसी ने बच्चे के पिता को फिरौती के लिए फोन किया था और सलीम को अमीर परिवार के बच्चे के अपहरण की सलाह दी थी।
1997 में हुई उम्रकैद की सजा
जांच पूरी होने के बाद अदालत ने 5 अगस्त 1997 को सलीम और अनिल दोनों को दोषी ठहराया। कोर्ट ने जुर्माने के साथ दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की। इसी दौरान कोर्ट ने 24 नवंबर 2000 के आदेश के तहत सलीम को अंतरिम जमानत दे दी। इसके बाद उसने कभी आत्मसमर्पण नहीं किया और पूरी तरह से फरार हो गया।
खुद को मृत घोषित कर बदली पहचान
फरार होने के बाद सलीम देश के अलग-अलग राज्यों में नाम बदलकर रहने लगा। वह हरियाणा के करनाल और अंबाला जैसे इलाकों में रहा जहां उसने अलमारी बनाने का काम किया। 2010 में वह स्थायी रूप से गाजियाबाद के लोनी में आकर बस गया। यहां उसने सलीम वास्तिक उर्फ सलीम अहमद के नाम से नई पहचान बनाई और महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोल ली।
गुप्त सूचना और फिंगरप्रिंट ने खोली पोल
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एक टीम को फरार अपराधियों पर निगरानी का काम सौंपा गया था। इसी दौरान टीम को गुप्त सूचना मिली कि यूट्यूबर सलीम वास्तिक ही 31 साल पुरानी हत्या का आरोपी है। पुलिस ने कड़कड़डूमा कोर्ट से पुराना रिकॉर्ड निकाला और फिंगरप्रिंट तथा तस्वीरों का मिलान किया। इस वैज्ञानिक जांच से पूरी तरह पुष्टि हो गई कि सलीम वास्तिक ही वह सलीम खान है।
