India News: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी भारी तनाव के बीच भारत सरकार ने घरेलू रसोई गैस की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी और मिडिल ईस्ट के अशांत माहौल ने गैस आपूर्ति पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए खाड़ी देशों पर अपनी निर्भरता को रणनीतिक रूप से कम करना शुरू कर दिया है। वैकल्पिक रास्तों और घरेलू उत्पादन पर जोर देकर एलपीजी क्राइसिस को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
स्पॉट मार्केट से गैस की ताबड़तोड़ खरीदारी
वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के कारण गैस सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ सरकारी तेल कंपनियों ने अब स्पॉट मार्केट से बड़ी मात्रा में गैस की खरीदारी शुरू कर दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए लगातार नए कार्गो खरीदे जा रहे हैं। जून और जुलाई तक अमेरिका से खरीदे गए ये गैस कार्गो भारत पहुंचने की पूरी उम्मीद है।
सिर्फ खाड़ी देश नहीं, अब इन 15 देशों से आएगा माल
युद्ध जैसी स्थितियों से पहले भारत अपनी एलपीजी जरूरत का 90 फीसदी हिस्सा सिर्फ खाड़ी देशों (UAE, कतर, सऊदी अरब) से मंगवाता था। लेकिन मोदी सरकार के ‘प्लान बी’ के तहत अब आपूर्ति में विविधता लाई गई है। अब भारत को एलपीजी सप्लाई करने वाले देशों की संख्या 10 से बढ़कर 15 हो गई है। वर्तमान में सरकार अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से गैस खरीद रही है। करीब 8 लाख टन एलपीजी का कार्गो पहले ही सुरक्षित किया जा चुका है।
घरेलू उत्पादन में 20 प्रतिशत का बड़ा इजाफा
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार, भारत में रोजाना करीब 80,000 टन एलपीजी की जरूरत पड़ती है। संकट को भांपते हुए सरकार ने घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाने का सख्त आदेश दिया था। इसके परिणामस्वरूप देश में घरेलू उत्पादन 20 फीसदी बढ़कर अब 46,000 टन रोजाना हो गया है। इस वृद्धि ने भारत की आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम किया है। मंत्रालय का स्पष्ट रुख है कि जहां से भी सुरक्षित और किफायती कार्गो मिलेगा, सरकार वहीं से गैस मंगाएगी।
