दुनिया की सांसें थमीं: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान का ‘सीक्रेट’ जाल, क्या डूब जाएंगे तेल के महाकाय टैंकर?

Middle East News: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरान द्वारा समुद्र के भीतर बिछाई जा रही घातक माइन्स ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक है। अमेरिका ने अब इस इलाके में माइन हटाने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। स्थिति इतनी नाजुक है कि किसी भी चूक का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है।

ईरान की नई रणनीति: छोटी नावें और घातक माइन्स

ईरान ने अब समुद्र में माइन्स बिछाने के लिए एक बेहद शातिर और नई रणनीति अपनाई है। बड़े जहाजों के बजाय अब छोटी और तेज रफ्तार नावों का इस्तेमाल प्लेटफॉर्म के रूप में किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान इन माइन्स का सटीक नक्शा खुद भी नहीं जानता है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के पास इन माइन्स को हटाने की क्षमता काफी कम है। इससे यह पूरा समुद्री इलाका जहाजों के लिए एक ‘मौत का कुआं’ बनता जा रहा है।

महाम 3 और महाम 7: आधुनिक सेंसर से लैस हथियार

ईरान मुख्य रूप से दो खतरनाक समुद्री माइन्स, महाम 3 और महाम 7 का उपयोग कर रहा है। ये पारंपरिक माइन्स से कहीं अधिक एडवांस हैं क्योंकि इनमें मैग्नेटिक और एकॉस्टिक सेंसर लगे होते हैं। जैसे ही कोई बड़ा जहाज इनके पास से गुजरता है, ये सक्रिय होकर भीषण विस्फोट करती हैं। महाम 3 का वजन 383 किलो है, जो सुपरटैंकरों को डुबोने की क्षमता रखती है। वहीं महाम 7 उथले पानी में मध्यम आकार के जहाजों के लिए काल साबित हो सकती है।

वैश्विक व्यापार पर संकट और अमेरिका की चुनौती

माइन्स को ढूंढकर नष्ट करना एक बेहद जटिल और जोखिम भरा सैन्य ऑपरेशन होता है। पारंपरिक माइन्सवीपर जहाजों पर हमले का खतरा हमेशा बना रहता है। इसलिए अमेरिका अब अंडरसी माइन हंटर और बिना चालक वाले ड्रोन सिस्टम का सहारा ले रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई का एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। यहां रास्ता बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाहाकार मच सकता है। कम लागत वाली ये माइन्स बड़ी वैश्विक ताकतों के लिए सिरदर्द बन गई हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून और ईरान का कड़ा रुख

समुद्री मार्गों को बाधित करना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माना जाता है। हालांकि, ईरान का दावा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का एक बड़ा हिस्सा उसके संप्रभु अधिकार क्षेत्र में आता है। सैन्य तनाव के चलते यह आशंका है कि ईरान माइन्स की लोकेशन की जानकारी साझा नहीं करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम वैश्विक व्यापार को बंधक बनाने की एक बड़ी सोची-समझी रणनीति है। दुनिया भर के विशेषज्ञ अब इस संवेदनशील क्षेत्र में होने वाली हर हलचल पर नजर रख रहे हैं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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