Himachal News: हिमाचल प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग सत्ताइस या अट्ठाइस अप्रैल को चुनावी कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर सकता है। फिलहाल आयोग का पूरा ध्यान उन चार सौ पचास पंचायतों पर है, जो परिसीमन या नए गठन से प्रभावित हुई हैं। इन पंचायतों में मतदाता सूचियों को अंतिम रूप देने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची सोमवार को इसकी व्यापक समीक्षा करेंगे।
मतदाता सूचियों की तैयारी पर टिकी आयोग की नजर
राज्य निर्वाचन आयोग के लिए मतदाता सूचियों का सटीक प्रकाशन सबसे बड़ी चुनौती है। नियमों के मुताबिक हर वार्ड के लिए अलग सूची तैयार करना अनिवार्य होता है। वार्ड आधार पर बीस-बीस सूचियों को प्रकाशित किया जाता है ताकि चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे। सोमवार की बैठक में आयुक्त अनिल खाची यह देखेंगे कि कितनी पंचायतों में काम पूरा हो चुका है। इस समीक्षा के बाद ही पंचायत चुनाव की तारीखों पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
वार्ड स्तर पर आरक्षण रोस्टर और सूची का महत्व
पंचायत चुनाव की शुचिता बनाए रखने के लिए वार्ड स्तर पर आरक्षण रोस्टर का पालन जरूरी है। हर वार्ड की अलग मतदाता सूची अधिसूचित होने के बाद ही नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। आयोग यह सुनिश्चित कर रहा है कि नवगठित पंचायतों के वोटरों को किसी तरह की असुविधा न हो। पारदर्शी और व्यवस्थित चुनाव के लिए स्थानीय निकाय नियमों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। अट्ठाइस अप्रैल तक प्रदेश में चुनावी आचार संहिता लागू होने की प्रबल संभावना है।
समीक्षा बैठक के बाद होगी तारीखों की बड़ी घोषणा
सत्ताइस अप्रैल का दिन हिमाचल की ग्रामीण राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाला है। इस दिन विशेष रूप से लंबित मतदाता सूचियों की स्थिति जांची जाएगी। जिन क्षेत्रों में परिसीमन के कारण बदलाव हुए हैं, वहां के आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयुक्त की हरी झंडी मिलते ही जिलों को चुनाव संबंधी निर्देश जारी कर दिए जाएंगे। इसके बाद उम्मीदवार अपनी चुनावी तैयारियों को औपचारिक रूप से गति दे सकेंगे।
