दिल्ली में फिर लौट सकता है सीलिंग का दौर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एमसीडी ने शुरू की बड़ी तैयारी, सात दिन में मांगी पूरे शहर के सर्वे की रिपोर्ट

Delhi News: राजधानी दिल्ली में एक बार फिर सीलिंग और तोड़फोड़ की कार्रवाई का खतरा मंडराने लगा है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद एमसीडी ने पूरे शहर में संपत्तियों के दुरुपयोग का व्यापक सर्वे कराने का निर्देश जारी कर दिया है। यह रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी जाएगी जिसके बाद रिहायशी इमारतों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा। लाखों लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं।

2006 और 2017 के बाद अब तीसरी बार होगा इतना बड़ा सर्वे

दिल्ली में इससे पहले साल 2006-07 और फिर 2017-18 में इसी तरह का बड़े पैमाने पर सर्वे और सीलिंग अभियान चलाया जा चुका है। उस दौरान हजारों संपत्तियों को सील कर दिया गया था। अमर कॉलोनी जैसे बड़े-बड़े बाजार कई सालों तक बंद पड़े रहे थे। अब तीसरी बार यह प्रक्रिया शुरू होने जा रही है जिससे व्यापारियों और रिहायशी इमारतों में रहने वालों में हड़कंप मच गया है।

एमसीडी आयुक्त ने सभी जोनल अधिकारियों को दिए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देश की सभी राजधानी नगर निगमों को इस मामले में पक्षकार बनाते हुए अपने-अपने इलाकों की विस्तृत जांच के आदेश दिए थे। इसी के तहत एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने सभी जोनल उपायुक्तों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि तय समय सीमा के भीतर हर हाल में संपत्तियों के दुरुपयोग की जांच कर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

अधिकृत से लेकर अनधिकृत कॉलोनियां सब होंगी जांच के दायरे में

यह सर्वे सिर्फ अधिकृत कॉलोनियों तक ही सीमित नहीं रहेगा। अनधिकृत और नियमित की गई कॉलोनियों, ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों और प्लाटेड डेवलपमेंट क्षेत्रों को भी इसके दायरे में लिया जाएगा। एमसीडी सीमा के भीतर आने वाले सभी रिहायशी इलाकों और उनसे घिरे अलग-थलग क्षेत्रों की भी पूरी जांच होगी। कोई भी इलाका इस सर्वे की जद से बाहर नहीं रहेगा।

अधिकारियों को मौके पर जाकर करना होगा निरीक्षण

अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट तैयार न करें बल्कि खुद मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण करें। उन्हें सभी जरूरी रिकॉर्ड का सत्यापन करना होगा और जोनवार उल्लंघनों की विस्तृत सूची तैयार करनी होगी। आदेश में साफ कहा गया है कि एकत्र किया गया डाटा पूरी तरह सटीक और प्रामाणिक होना चाहिए क्योंकि इसी को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे के रूप में दाखिल किया जाएगा।

गलत जानकारी देने पर अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही

एमसीडी ने सख्त चेतावनी दी है कि सर्वे रिपोर्ट में किसी भी तरह की चूक या गलत जानकारी के लिए संबंधित अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी। सभी जोनल रिपोर्ट को सात दिनों के भीतर अतिरिक्त आयुक्त इंजीनियरिंग को सौंपने का आदेश दिया गया है। इसके बाद एक समेकित रिपोर्ट तैयार कर समय पर अदालत में पेश की जाएगी।

सात दिन की समयसीमा पर उठे सवाल

इस अभियान की बेहद कम समय सीमा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि इतने विशाल शहर का सर्वे महज सात दिनों में कर पाना बहुत बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कई इलाकों में पहले से ही सर्वे हो चुके हैं और कई सड़कों को भू-मिश्रित या व्यावसायिक दर्जा देने के मामले लंबित हैं, जिन पर भी ध्यान देना जरूरी है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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