Delhi News: पत्नी के चरित्र पर शक कर उसकी बेरहमी से हत्या करने वाला 84 वर्षीय आरोपित 40 साल बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। क्राइम ब्रांच ने चंद्र शेखर प्रसाद को अलीपुर स्थित नांगली पूना की एक फैक्ट्री के स्टोररूम से पकड़ा। वह इतने लंबे समय से पहचान बदलकर बिहार, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में छिपता रहा। 1987 में अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।
1986 में शकरपुर में रची थी सनसनीखेज वारदात
उपायुक्त संजीव कुमार यादव के अनुसार, 19 अक्टूबर 1986 को पूर्वी दिल्ली के शकरपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। चंद्र शेखर प्रसाद ने अपने साथियों के साथ मिलकर अपनी ही पत्नी की ईंटों से सिर कुचलकर निर्मम हत्या कर दी। आरोप है कि पति को उसके चरित्र पर गहरा शक था। इसी बात को लेकर अक्सर दोनों के बीच जबरदस्त झगड़ा होता रहता था।
नौकर को बंदूक की नोक पर बनाया था बंधक
वारदात को अंजाम देते वक्त आरोपियों ने घर में मौजूद नौकर को भी बंदूक की नोक पर बंधक बना लिया था। इस दौरान उसे बुरी तरह डराया-धमकाया गया। घटना को अंजाम देने के तुरंत बाद चंद्र शेखर प्रसाद मौके से फरार हो गया। पुलिस लगातार उसकी तलाश करती रही लेकिन वह हर बार हाथ नहीं आया। 1987 में अदालत ने उसे औपचारिक रूप से भगोड़ा घोषित कर दिया।
कभी रिक्शा चलाया तो कभी आश्रम में ली शरण
फरारी के दौरान आरोपित ने कभी एक जगह पर टिककर नहीं रहा। पुलिस के अनुसार, वह बिहार, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में छिपता फिरा। पहचान छिपाने के लिए वह लगातार ठिकाने और नाम बदलता रहा। कभी उसने किसी आश्रम में शरण ली तो कभी पटियाला में रिक्शा चलाकर गुजर-बसर की। इस तरह वह चार दशकों तक कानून की गिरफ्त से दूर रहने में कामयाब रहा।
परिवार तक पहुंचने पर पुलिस को मिली सफलता
हाल के महीनों में क्राइम ब्रांच ने इस अनसुलझे मामले को फिर से खंगाला और इंस्पेक्टर सुनील कुमार कालखंडे के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम गठित की। टीम ने तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के सहारे आरोपित के परिवार और पुराने ठिकानों की पड़ताल शुरू की। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपित के बच्चे अब भी दिल्ली और बिहार में रह रहे हैं।
नालंदा से मिली अहम लोकेशन
संदिग्ध मोबाइल नंबरों की निगरानी और बिहार के नालंदा में फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान अहम सुराग हाथ लगे। पुलिस को पुख्ता हुआ कि आरोपित जिंदा है और कभी-कभार वहां आता-जाता रहता है। तकनीकी इनपुट के आधार पर उसकी सटीक लोकेशन उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में ट्रेस कर ली गई। इसके बाद पुलिस ने पूरी प्लानिंग के साथ जाल बिछाया।
फैक्ट्री के स्टोररूम से हुआ गिरफ्तार
22 अप्रैल को पुलिस ने आरोपित को अलीपुर के नांगली पूना इलाके में एक फैक्ट्री के स्टोररूम से दबोच लिया। वह वहां पूरी तरह से फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि शक और गुस्से में आकर उसने पत्नी की जान ले ली और वारदात के बाद तुरंत फरार हो गया था।
40 साल में बदल गया था पूरा हुलिया
पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपित को पकड़ना बहुत बड़ी चुनौती थी। वारदात के समय उसकी उम्र करीब 40 साल थी और अब वह 84 साल का हो चुका है। चेहरा और शरीर पूरी तरह बदल गया था। उस जमाने में अदालतों के रिकॉर्ड डिजिटल नहीं बल्कि केवल कागजी होते थे। न कोई आधार कार्ड था, न मोबाइल डेटा और न ही कोई फोटो उपलब्ध थी। सब कुछ बेहद सीमित था। बावजूद इसके लगातार प्रयास और सूझबूझ से पुलिस ने सफलता हासिल की। यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि कानून का हाथ बहुत लंबा होता है।
