Entertainment News: सिनेमा की चकाचौंध के पीछे अक्सर गहरे दर्द छिपे होते हैं। दिग्गज अभिनेत्री सुधा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने फर्श से अर्श और फिर अर्श से फर्श तक का सफर देखा। बचपन में आलीशान जिंदगी जीने वाली सुधा ने अपने पिता की बीमारी के कारण गरीबी का सामना किया। करियर में 250 से ज्यादा फिल्में करने के बाद जब दौलत वापस आई, तो एक गलत फैसले ने उन्हें दोबारा सड़क पर ला खड़ा किया। आज वह साहस की मिसाल हैं।
बचपन की अमीरी और पिता की बीमारी: 8 साल की उम्र में बदला भाग्य
सुधा का जन्म एक बेहद संपन्न परिवार में हुआ था। उनके घर में नौकरों की फौज और लग्जरी गाड़ियों का काफिला रहता था। हालांकि, जब वह महज 8 साल की थीं, तब उनके पिता को कैंसर हो गया। पिता के इलाज में परिवार ने अपनी सारी जमा-पूंजी और संपत्ति गंवा दी। आलीशान महल जैसा घर देखते ही देखते सुधा की आंखों के सामने बिक गया। लाड-प्यार में पली-बढ़ी सुधा को कम उम्र में ही कड़े संघर्ष और गरीबी का सामना करना पड़ा।
फिल्मी दुनिया में कामयाबी का सफर: 250 से अधिक फिल्मों में किया काम
कठिन समय देखने के बाद सुधा ने साल 1984 में फिल्म ‘ओह माने माने’ से अपने करियर की शुरुआत की। उनकी प्रतिभा ने जल्द ही उन्हें तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ सिनेमा का बड़ा नाम बना दिया। उन्होंने अपने पूरे करियर में 250 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि उन्होंने बॉलीवुड में भी अपनी पहचान बनाई। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी मेहनत से दोबारा वह सारी दौलत और शोहरत हासिल कर ली, जो बचपन में खो गई थी।
एक ‘गलत साइन’ और फिर कंगाली: दिल्ली में होटल बिजनेस पड़ा भारी
सफलता के चरम पर सुधा ने बिजनेस की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया। उन्होंने दिल्ली में एक बड़ा होटल खोला, लेकिन यह फैसला उनके लिए आत्मघाती साबित हुआ। एक पुराने साक्षात्कार में सुधा ने खुलासा किया कि उनके एक गलत हस्ताक्षर ने उनका पूरा बैंक बैलेंस शून्य कर दिया। होटल में हुए भारी घाटे के कारण वह एक ही झटके में फिर से सड़क पर आ गईं। उनकी सालों की मेहनत से कमाई गई करोड़ों की संपत्ति पल भर में खत्म हो गई।
अकेलापन और पारिवारिक संकट: बुरे वक्त में अपनों ने भी फेरा मुंह
आर्थिक तबाही के बाद सुधा पर व्यक्तिगत दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उन्होंने बताया कि जब उनकी कंगाली के दिन आए, तो उनके पति ने भी उनका साथ छोड़ दिया। इतना ही नहीं, उनका बेटा भी उन्हें अकेले छोड़कर विदेश चला गया। हर तरफ से हार चुकी सुधा के पास जीने की कोई वजह नहीं बची थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने फिर से छोटे-मोटे किरदारों से काम शुरू किया और आज वह फिर से इंडस्ट्री में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
बॉलीवुड का सफर: हिंदी फिल्मों में भी छोड़ी अपनी छाप
सुधा ने साउथ के साथ-साथ बॉलीवुड की चर्चित फिल्मों में भी काम किया है। साल 1992 में वह सुपरस्टार चिरंजीवी के साथ फिल्म ‘आज का गुंडाराज’ में नजर आईं, जो सुपरहिट रही थी। इसके अलावा उन्होंने सैफ अली खान और ट्विंकल खन्ना की फिल्म ‘लव के लिए कुछ भी करेगा’ में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में वह कई बड़ी वेब सीरीज और फिल्मों का हिस्सा हैं। उनकी कहानी सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।
