दिव्या भारती की आखिरी फिल्म का वो अनसुना सच: मौत से ठीक 10 दिन पहले हुई थी रिलीज, संजय दत्त के कारण हुई थी फ्लॉप?

Bollywood News: बॉलीवुड की सबसे कम उम्र की सुपरस्टार दिव्या भारती का निधन आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े रहस्यों में से एक माना जाता है। 5 अप्रैल 1993 को मात्र 19 साल की उम्र में बंबई स्थित अपने अपार्टमेंट की पांचवीं मंजिल से गिरने के कारण उनकी मौत हो गई थी। हालांकि उनकी मृत्यु को आधिकारिक तौर पर एक दुर्घटना माना गया, लेकिन उनके निधन से ठीक 10 दिन पहले रिलीज हुई फिल्म ‘क्षत्रिय’ से जुड़ी यादें आज भी प्रशंसकों के दिलों में ताजा हैं।

निधन से महज 10 दिन पहले बड़े पर्दे पर दिखी थीं दिव्या

दिव्या भारती की आखिरी फिल्म ‘क्षत्रिय’ 26 मार्च 1993 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। जेपी दत्ता के निर्देशन में बनी यह एक्शन ड्रामा फिल्म उनकी मौत से ठीक 10 दिन पहले पर्दे पर आई थी। इस फिल्म में वे सनी देओल के साथ नजर आई थीं। इससे पहले 1992 में भी इसी जोड़ी ने ‘विश्वात्मा’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म दी थी। ‘क्षत्रिय’ उनके जीवनकाल में रिलीज होने वाली आखिरी फिल्म साबित हुई, जिसने बॉक्स ऑफिस पर काफी सुर्खियां बटोरी थीं।

दिग्गज सितारों से सजी थी जेपी दत्ता की ‘क्षत्रिय’

‘क्षत्रिय’ उस दौर की सबसे बड़ी मल्टी-स्टारर फिल्मों में से एक थी। फिल्म में दिव्या भारती और सनी देओल के अलावा संजय दत्त, धर्मेंद्र, विनोद खन्ना और मीनाक्षी शेषाद्री जैसे दिग्गज कलाकार शामिल थे। फिल्म की स्टार कास्ट इतनी मजबूत थी कि इसमें राखी गुलजार, कबीर बेदी और प्रेम चोपड़ा जैसे सितारों ने भी अहम भूमिकाएं निभाई थीं। इतना ही नहीं, सुनील दत्त ने भी इस फिल्म में एक विशेष कैमियो किया था, जो दर्शकों के लिए बड़ा सरप्राइज था।

संजय दत्त की गिरफ्तारी ने बिगाड़ा फिल्म का खेल

रिपोर्ट्स के अनुसार, 5 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट में बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी। फिल्म ने महज 3 करोड़ रुपये की ही कमाई की थी। इसकी सबसे बड़ी वजह 1993 के मुंबई बम धमाकों में संजय दत्त का नाम आना और उनकी गिरफ्तारी को माना जाता है। संजय दत्त के जेल जाने के बाद फिल्म की स्क्रीनिंग कई जगहों पर रोक दी गई थी। इस विवाद के कारण फिल्म अपनी लागत निकालने में भी पूरी तरह असफल रही थी।

राजपूती आन-बान और दुश्मनी की एक अनोखी गाथा

फिल्म ‘क्षत्रिय’ की कहानी राजस्थान की पृष्ठभूमि पर आधारित थी। यह दो शाही राजपूत परिवारों, मिरतागढ़ और सूरजगढ़ के बीच पीढ़ियों से चली आ रही रंजिश को दिखाती है। कहानी में मोड़ तब आता है जब इन परिवारों के बेटे (सनी देओल और संजय दत्त) लंदन में दोस्त बन जाते हैं। भारत लौटने पर उन्हें अपनी पारिवारिक दुश्मनी का पता चलता है, जिसके बाद वे इस खून-खराबे को रोकने के लिए संघर्ष करते नजर आते हैं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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