बंगाल में छिड़ा ‘वोटर लिस्ट’ महासंग्राम: क्या चुनाव ड्यूटी कर रहे कर्मचारी ही नहीं दे पाएंगे वोट? सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा झटका!

West Bengal News: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मचे घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे राहत के लिए संबंधित अपलीय ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाएं। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब पता चला कि नाम कटने वालों में वे लोग भी शामिल हैं, जो खुद चुनाव ड्यूटी कर रहे हैं।

चुनाव ड्यूटी करने वाले 65 कर्मचारी भी सूची से बाहर

मतदाताओं का पक्ष रख रहे वकील एमआर शमशाद ने कोर्ट को बताया कि मतदाता सूची से नाम हटना पूरी तरह मनमाना है। हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों के नाम काटे गए हैं, उनमें 65 ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं जो वर्तमान में चुनाव ड्यूटी पर तैनात हैं। उनके ड्यूटी ऑर्डर में इपिक (EPIC) नंबर दर्ज हैं, लेकिन वे खुद वोट देने के अधिकार से वंचित हो गए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जो लोग चुनाव करा रहे हैं, उन्हें ही मतदान से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

ट्रिब्यूनल में लंबित अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को समझा। हालांकि, कोर्ट ने सीधे हस्तक्षेप के बजाय ट्रिब्यूनल को ही प्राथमिकता दी। जस्टिस बागची ने यह स्वीकार किया कि जिनकी अपीलें फिलहाल लंबित हैं, वे शायद इस चुनाव में मतदान न कर पाएं। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची में नाम बहाल कराना एक अधिक महत्वपूर्ण और स्थाई अधिकार है, जिसे सुरक्षित रखा जाना अनिवार्य है।

27 लाख अपीलों का अंबार और धीमी सुनवाई की शिकायत

सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया। उन्होंने अदालत को बताया कि बंगाल में करीब 27 लाख अपीलें लंबित हैं, जिनमें से अब तक केवल 136 मामलों का निपटारा हुआ है। सुनवाई की इस कछुआ चाल पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने की सलाह दी है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई मामला अत्यंत महत्वपूर्ण है, तो उसकी जल्द सुनवाई सुनिश्चित की जाए।

बंगाल में 92 प्रतिशत मतदान और शांति पर कोर्ट ने जताई खुशी

कानूनी विवादों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में हुए भारी मतदान और हिंसा की अनुपस्थिति की जमकर सराहना की। जब पीठ को बताया गया कि बंगाल में 92 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, तो मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इसे लोकतंत्र के लिए एक सुखद संकेत बताया। उन्होंने कहा कि एक नागरिक के तौर पर इतना ऊंचा मतदान प्रतिशत देखना गर्व की बात है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुरक्षाबलों के काम की सराहना करते हुए इसे बड़ी उपलब्धि बताया।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की हर तरफ हो रही तारीफ

जस्टिस बागची ने बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा न होने पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने एक दार्शनिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अक्सर राजाओं के युद्ध में आम आदमी की जान जाती है, लेकिन इस बार बंगाल सुरक्षित रहा। उन्होंने चुनाव आयोग के वकील से कहा कि इस बार एक बड़े बदलाव के रूप में आपके मुवक्किल (चुनाव आयोग) की चारों तरफ प्रशंसा हो रही है। आयोग ने जमीनी स्तर पर शांति व्यवस्था बनाए रखने में काफी हद तक सफलता हासिल की है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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