Himachal News: हिमाचल प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनावों में महिलाओं का दबदबा पूरी तरह कायम रहने वाला है। राज्य में इस बार नारी शक्ति सभी समीकरणों पर भारी पड़ती दिख रही है। आंकड़ों के अनुसार, पंचायत प्रतिनिधियों के कुल पदों में से लगभग 58 प्रतिशत पर महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलेगा। वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद अध्यक्ष तक की आरक्षित सीटों को जोड़ें तो 72 प्रतिशत तक हिस्सेदारी महिलाओं और अन्य आरक्षित वर्गों के नाम है।
सिर्फ 30 प्रतिशत अनारक्षित सीटों पर छिड़ा घमासान
राज्य में आरक्षण के नए रोस्टर ने राजनीतिक दलों और स्थानीय उम्मीदवारों की नींद उड़ा दी है। अनारक्षित श्रेणी के लिए अब केवल 30 प्रतिशत या उससे भी कम सीटें बची हैं। इससे पंचायतों में महिला नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका बेहद मजबूत होगी। अनारक्षित पदों के कम होने के कारण कई दिग्गज प्रत्याशी अब चुनावी मैदान से बाहर हो गए हैं। कई क्षेत्रों में उम्मीदवार आपसी सहमति बनाने में भी नाकाम साबित हो रहे हैं।
वार्ड सदस्यों में महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी
त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रणाली में महिलाओं की सबसे अधिक भागीदारी वार्ड सदस्य के पद पर देखी जा रही है। यहां कुल 21,678 पदों में से 12,709 सीटों पर महिलाएं काबिज होंगी, जो कुल संख्या का 58.63 प्रतिशत है। प्रधान के पदों पर भी महिलाओं का वर्चस्व है और 50.55 प्रतिशत सीटों पर वे चुनाव लड़ेंगी। सरकार ने एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए भी उनकी जनसंख्या के अनुपात में सटीक हिस्सेदारी सुनिश्चित की है।
विभिन्न पदों पर आरक्षण का पूरा गणित
पंचायती राज संस्थाओं के विभिन्न पदों पर आरक्षण का विश्लेषण करें तो प्रधान के कुल 3758 पदों में से 1900 पद महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं। वार्ड सदस्यों के 21,678 पदों में से 12,709 सीटों पर महिला शक्ति का कब्जा रहेगा। पंचायत समिति अध्यक्ष के 92 में से 48 और सदस्यों के 1769 में से 919 पदों पर महिलाएं चुनाव लड़ेंगी। इसी तरह जिला परिषद अध्यक्ष के 12 में से 6 और सदस्यों के 251 में से 128 पद महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किए गए हैं।
महिला नेतृत्व से बदलेंगे ग्रामीण समीकरण
आरक्षण की इस नई व्यवस्था से हिमाचल के ग्रामीण इलाकों में सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की नई लहर आएगी। पंचायतों में महिला प्रधानों और सदस्यों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर अधिक संवेदनशीलता दिखने की उम्मीद है। हालांकि, अनारक्षित पदों की कमी के कारण पुरुष उम्मीदवारों में थोड़ी नाराजगी भी देखी जा रही है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह चुनाव प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
