Bihar News: बिहार की नई सरकार ने राज्य को औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए कमर कस ली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में अब ‘न्यू एज इंडस्ट्री’ यानी सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलना है। दिल्ली में हाल ही में आयोजित एआई समिट के दौरान कई दिग्गज कंपनियों से इस संबंध में सकारात्मक बातचीत हुई है।
सेमीकंडक्टर प्लांट के लिए टोकन राशि पर जमीन
राज्य सरकार ने निवेश को सरल बनाने के लिए ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव किए हैं। अब सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित करने वाली कंपनियों को 100 करोड़ रुपये के निवेश प्रोजेक्ट पर एक एकड़ जमीन मात्र एक रुपये की टोकन राशि पर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, निवेशकों को स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क से पूरी तरह छूट मिलेगी। यह कदम उद्योगों की स्थापना लागत को काफी कम कर देगा, जिससे बिहार निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनेगा।
पेटेंट और बौद्धिक संपदा पर भारी सब्सिडी
बिहार सरकार नवाचार और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए भी प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है। उद्योग विभाग के अनुसार, पात्र कंपनियों को पेटेंट फाइल करने और उनके रख-रखाव पर आने वाली लागत की 75 प्रतिशत राशि वापस की जाएगी। यह सुविधा न केवल भारत में, बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान और चीन जैसे वैश्विक क्षेत्रों में पेटेंट आवेदन पर भी लागू होगी। इससे राज्य में बौद्धिक संपदा के निर्माण को नई गति मिलेगी।
युवाओं की ट्रेनिंग का पूरा खर्च उठाएगी सरकार
रोजगार सृजन के उद्देश्य से सरकार ने स्थानीय कार्यबल को कुशल बनाने की योजना तैयार की है। सेमीकंडक्टर कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को दी जाने वाली ट्रेनिंग का 100 प्रतिशत खर्च सरकार वहन करेगी। हालांकि, यह लाभ केवल उन कर्मचारियों के लिए मान्य होगा जो बिहार के मूल निवासी हैं। इसके साथ ही, इन औद्योगिक इकाइयों को रियायती दरों पर जल आपूर्ति और बिजली शुल्क में विशेष सब्सिडी देने का भी प्रावधान किया गया है।
औद्योगिक क्रांति और बुनियादी ढांचे का विकास
बिहार में औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि सेमीकंडक्टर जैसी हाई-टेक इंडस्ट्री आने से राज्य की आर्थिक तस्वीर बदल जाएगी। उद्योग विभाग अब सक्रिय रूप से विभिन्न सेक्टर की कंपनियों तक अपनी नीतियों को पहुँचाने की कवायद में जुटा है। यह रणनीति न केवल पलायन को रोकेगी, बल्कि बिहार को देश के तकनीकी मानचित्र पर एक नई और मजबूत पहचान भी दिलाएगी।
