Punjab News: शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के उस कदम को ‘राजनीतिक नाटक’ करार दिया है, जिसमें उन्होंने राज्यसभा सांसदों को वापस बुलाने के लिए राष्ट्रपति से समय मांगा है। अकाली दल का कहना है कि सांसदों के दलबदल पर कार्रवाई करना राष्ट्रपति के नहीं बल्कि संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने इसे संवैधानिक नियमों की अनदेखी बताया और मुख्यमंत्री के इस कदम की तीखी आलोचना की है।
दलबदल विरोधी कानून और अकाली दल की दलील
डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने प्रेस बयान में स्पष्ट किया कि संविधान का दलबदल विरोधी कानून पूरी तरह स्पष्ट है। कानून के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो उन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिल्ली में याचिकाएं दायर करना केवल जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है। शिअद नेता ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि वे खुद नियमों की व्याख्या अपनी सुविधानुसार नहीं कर सकते।
डॉ. चीमा ने मुख्यमंत्री को याद दिलाई पुरानी नियुक्तियां
अकाली नेता ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर नैतिक रुख अपनाने का कोई अधिकार नहीं है। डॉ. चीमा ने याद दिलाया कि ‘आप’ सरकार ने खुद अकाली दल के एक विधायक को अपनी पार्टी में शामिल किया था। इतना ही नहीं, उस विधायक को सार्वजनिक क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण पद पर चेयरमैन भी नियुक्त किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तब लोकतांत्रिक नैतिकता का उल्लंघन नहीं हुआ था?
राज्यसभा नामांकन और बाहरी लोगों पर उठे सवाल
शिरोमणि अकाली दल ने राज्यसभा में भेजे गए प्रतिनिधियों की पृष्ठभूमि पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। डॉ. चीमा ने पूछा कि ‘आप’ ने पंजाब के आम आदमी प्रतिनिधियों के बजाय अति-अमीर बाहरी लोगों को उच्च सदन में क्यों भेजा? उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि क्या नागरिकों को उन विधायकों को भी वापस बुलाने का अधिकार है जो जनता की कसौटी पर विफल रहे हैं। उन्होंने इसे जवाबदेही के सिद्धांत का चयनात्मक उपयोग करार दिया है।
नए जनादेश की मांग और संवैधानिक चुनौती
अकाली दल ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी है कि वे संवैधानिक दिखावे के बजाय जनता का सामना करें। डॉ. चीमा ने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी वास्तव में लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखती है, तो उसे राज्यपाल से नए जनादेश की मांग करनी चाहिए। उनके अनुसार, केवल चुनाव के जरिए ही जनता का विश्वास बहाल हो सकता है। दिल्ली में प्रतीकात्मक प्रदर्शन करने से पंजाब की जमीनी हकीकत और जनता की नाराजगी को बदला नहीं जा सकता है।
