शिमला के 102 साल पुराने अस्पताल पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सुक्खू सरकार की योजना पर रोक से मचा हड़कंप

Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य की सुक्खू सरकार को बड़ा झटका देते हुए शिमला के ऐतिहासिक कमला नेहरू अस्पताल (KNH) की शिफ्टिंग पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार के फैसले पर कड़े सवाल उठाए हैं। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि गायनी वार्ड और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं को आईजीएमसी स्थानांतरित करने की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए। इसके साथ ही सरकार से तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

अदालत ने सरकार से तीन दिन में मांगी विस्तृत रिपोर्ट

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। खंडपीठ ने न केवल गायनी ओपीडी की शिफ्टिंग पर रोक लगाई, बल्कि डेंटल कॉलेज से जुड़े प्रस्ताव को भी फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि 102 साल पुराना यह अस्पताल केवल एक इमारत नहीं, बल्कि प्रदेश की लाखों महिलाओं की सेहत का आधार है। अस्पताल की सेवाओं को स्थानांतरित करने से इसकी ऐतिहासिक पहचान और स्वतंत्र अस्तित्व खत्म होने का खतरा है।

आंदोलन की जीत: महिला संगठनों और जनता ने जताया आभार

जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष फालमा चौहान ने हाईकोर्ट के इस फैसले को जन-आंदोलन की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से महिलाएं और सामाजिक संगठन इस ऐतिहासिक संस्थान को बचाने के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे। अदालत के हस्तक्षेप ने दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों और गर्भवती माताओं की चिंताओं को मजबूती दी है। महिला संगठनों का मानना है कि यह निर्णय स्वास्थ्य सुविधाओं के निजीकरण या उन्हें कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ एक ढाल है।

विपक्ष के निशाने पर सुक्खू सरकार, भाजपा ने बताया ‘संवेदनहीनता’

भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने कहा कि हाईकोर्ट की रोक कांग्रेस सरकार की संवेदनहीनता पर एक करारा तमाचा है। भाजपा का आरोप है कि सरकार जनभावनाओं और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को समझे बिना जल्दबाजी में निर्णय ले रही थी। पार्टी ने इस मामले को लेकर राजभवन तक मार्च किया था और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की थी। भाजपा इसे अपनी और जनता की सामूहिक आवाज की जीत मान रही है।

शिफ्टिंग के पीछे सरकार का तर्क और चौतरफा विरोध

राज्य सरकार ने दलील दी थी कि आईजीएमसी में शिफ्टिंग से मरीजों को आधुनिक चिकित्सा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। हालांकि, इस तर्क को स्थानीय लोगों और अस्पताल स्टाफ ने पूरी तरह खारिज कर दिया। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रतिभा सिंह ने भी इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए सरकार से विचार करने को कहा था। अब सबकी नजरें हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार के जवाब के बाद अस्पताल के भविष्य पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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