पश्चिमी यूपी को मिलेगा ‘दूसरा ब्रजघाट’, गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे शंकराटीला बनेगा नया धार्मिक केंद्र

Hapur News: उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध तीर्थ नगरी गढ़मुक्तेश्वर और ब्रजघाट के बाद अब पश्चिमी यूपी को एक नया धार्मिक केंद्र मिलने जा रहा है। गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण के साथ ही हापुड़ जिले का शंकराटीला गांव ‘दूसरे ब्रजघाट’ के रूप में उभरने को तैयार है। वर्तमान में ब्रजघाट में सुविधाओं के कारण हर महीने सात से आठ लाख श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जबकि मुख्य गढ़मुक्तेश्वर नगरी संसाधनों के अभाव में केवल मेलों तक सीमित है। अब शंकराटीला इस कमी को पूरा करेगा।

धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक विरासत

गंगा तट पर स्थित शंकराटीला गांव का गहरा धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान कौरवों और पांडवों की शिक्षा का साक्षी रहा है। यहां भगवान हनुमान और शिव के अत्यंत प्राचीन मंदिर स्थापित हैं, जहां समय-समय पर अनेक संत तपस्या के लिए आते हैं। एक्सप्रेस-वे के आने से पहले इस गांव की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी, लेकिन अब बुनियादी ढांचे के विकास से यहां की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है।

13 हेक्टेयर में बनेगा आधुनिक रेस्ट हाउस

उत्तर प्रदेश सरकार शंकराटीला में यात्रियों की सुविधा के लिए 13 हेक्टेयर भूमि पर एक भव्य रेस्ट हाउस (विश्राम गृह) बनाने जा रही है। एसडीएम श्रीराम यादव के अनुसार, इसके लिए आवश्यक भूमि खरीद का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इस रेस्ट हाउस तक पहुंचने के लिए गंगा एक्सप्रेस-वे से विशेष उतार-चढ़ाव (रैंप) की सुविधा दी जाएगी। इससे यहां ठहरने वाले यात्री बिना किसी परेशानी के गंगा स्नान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर सकेंगे।

जाम से मिलेगी मुक्ति, सर्विस रोड बनेगी लाइफलाइन

ब्रजघाट और गढ़मुक्तेश्वर में अक्सर पूर्णिमा और अमावस्या जैसे पर्वों पर भारी जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। इसके विपरीत, गंगा एक्सप्रेस-वे के माध्यम से शंकराटीला पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को ट्रैफिक की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। मेरठ के बिजौली से शंकराटीला तक सर्विस रोड का 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। इस मार्ग के पूरी तरह सक्रिय होते ही सिंभावली और गढ़-स्याना मार्ग से श्रद्धालु महज 15-20 मिनट में शंकराटीला पहुंच सकेंगे।

जमीन के दामों में आया 100 गुना उछाल

एक्सप्रेस-वे और रेस्ट हाउस की परियोजना के कारण शंकराटीला में जमीनों की कीमतों ने आसमान छू लिया है। करीब 15 साल पहले यहां जमीन महज 20 से 25 हजार रुपये प्रति बीघा थी, जो अब बढ़कर 20 से 25 लाख रुपये प्रति बीघा तक पहुंच गई है। गंगा तट को पत्थर डालकर सौंदर्यकरण का रूप दिया जा चुका है और एक निजी लग्जरी होटल का निर्माण भी पूरा हो गया है, जिसकी बुकिंग ऑनलाइन शुरू हो चुकी है।

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