हिमाचल प्रदेश की ‘लिंगड़ी’ सब्जी के दाम आसमान पर, औषधीय गुणों के कारण बढ़ी मांग

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के घने जंगलों में पाई जाने वाली औषधीय सब्जी ‘लिंगड़ी’ इन दिनों चर्चा में है। खराब मौसम और सर्दियों में कम बारिश के कारण इस जंगली सब्जी का उत्पादन काफी घट गया है। उत्पादन कम होने से बाजार में इसके दाम पिछले साल के मुकाबले लगभग पांच गुना तक बढ़ गए हैं। कुल्लू, मंडी और शिमला जैसे पहाड़ी जिलों में यह सब्जी अब 100 से 120 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।

सेहत के लिए वरदान है जंगली लिंगड़ी

आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार लिंगड़ी केवल एक सब्जी नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी है। इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। इसमें मौजूद विटामिन A आंखों की रोशनी बढ़ाता है और विटामिन C इम्युनिटी को मजबूत करता है। इसे नियमित आहार में शामिल करने से पाचन तंत्र, त्वचा और हड्डियों को जबरदस्त लाभ मिलता है। यही कारण है कि सीमित सीजन के बावजूद इसकी मांग बहुत अधिक रहती है।

पहचान में सावधानी है बेहद जरूरी

लिंगड़ी का वैज्ञानिक नाम ‘फिडलहेड फर्न’ है। यह कुल्लू, चंबा और किन्नौर के ठंडे इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगती है। हालांकि, जानकारों ने इसके सेवन को लेकर चेतावनी भी जारी की है। जंगलों में बिल्कुल लिंगड़ी जैसी दिखने वाली एक अन्य प्रजाति भी पाई जाती है, जो जहरीली हो सकती है। बिना सही पहचान के इसे तोड़ना खतरनाक हो सकता है। ग्रामीण विशेषज्ञ ही इसकी सही पहचान कर पाते हैं, जो इसे जंगलों से चुनकर लाते हैं।

ग्रामीण आर्थिकी का मुख्य आधार

लिंगड़ी का सीजन बहुत छोटा होता है, इसलिए ग्रामीण महिलाएं इसे एकत्र कर अचार भी बनाती हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं इसे मेलों और बाजारों में बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। इस बार उत्पादन कम होने से ग्रामीणों को जंगलों में काफी भीतर तक जाना पड़ रहा है। कड़ी मेहनत के बाद भी कम मात्रा मिल रही है, जिससे स्थानीय विक्रेताओं को ऊंचे दामों पर सब्जी बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

उत्पादन घटने से किसान और व्यापारी चिंतित

कुल्लू की भुंतर मंडी में पिछले साल तक लिंगड़ी 30 से 50 रुपये किलो बिक रही थी। इस वर्ष बारिश की कमी ने प्राकृतिक पैदावार को बुरी तरह प्रभावित किया है। व्यापारियों का कहना है कि आवक कम होने से दाम 100 रुपये के पार चले गए हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इसे खरीदने में पीछे नहीं हट रहे हैं। यह सब्जी न केवल स्वाद में बेमिसाल है, बल्कि पहाड़ी समुदायों के लिए रोजगार का बड़ा जरिया भी है।

Hot this week

Related News

Popular Categories