16,580 फीट की ऊंचाई पर खुला जन्नत का दरवाजा: 6 महीने बाद शिंकुला दर्रे पर उमड़े पर्यटक

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण दारचा-शिंकुला-जांस्कर पदुम मार्ग को छह महीने बाद दोबारा खोल दिया गया है। भारी बर्फबारी के कारण यह मार्ग लंबे समय से वाहनों की आवाजाही के लिए बंद पड़ा था। सीमा सड़क संगठन और योजक परियोजना के वीर जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद इस रास्ते को बहाल किया है। अब देश-दुनिया से आने वाले पर्यटक यहां की हसीन वादियों का दीदार कर सकेंगे।

समुद्र तल से करीब 16,580 फीट की ऊंचाई पर स्थित शिंकुला दर्रा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मार्ग खुलते ही सैकड़ों की संख्या में सैलानी यहां ताजी बर्फ का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। सीमा सड़क संगठन (BRO) के इंजीनियरों और मशीन ऑपरेटरों ने हाड़ कंपाने वाली ठंड में कई फीट बर्फ हटाकर इस मार्ग को सुचारू किया है। इस रणनीतिक मार्ग के खुलने से लद्दाख के जांस्कर क्षेत्र के लिए भी कनेक्टिविटी बेहतर हो गई है।

स्वर्ग से कम नहीं है शिंकुला दर्रे का नजारा

सफेद बर्फ की चादर से ढकी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं पर्यटकों को एक अलग ही दुनिया का अहसास करा रही हैं। यहां पहुंचे सैलानी शिंकुला दर्रे की तुलना अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों से कर रहे हैं। कई पर्यटकों का कहना है कि यह स्थान किसी जन्नत से कम नहीं है। भारी संख्या में लोग यहां फोटो और वीडियो बनाकर अपनी यादें संजो रहे हैं। पर्यटकों का मानना है कि विदेश जाने के बजाय अपने देश की ऐसी प्राकृतिक सुंदरता को निहारना चाहिए।

अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण प्रशासन ने स्वास्थ्य के प्रति भी आगाह किया है। शिंकुला दर्रे पर ऑक्सीजन की कमी से कुछ पर्यटकों को ‘हाई एल्टीट्यूड सिकनेस’ का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, कुछ देर विश्राम करने के बाद सैलानियों की स्थिति सामान्य हो रही है। पर्यटकों ने इस जगह को स्वच्छ रखने का संकल्प भी लिया है। उन्होंने अन्य लोगों से भी अपील की है कि वे यहां प्लास्टिक या कूड़ा फैलाकर प्रकृति को प्रदूषित न करें।

पर्यटकों के लिए जिला प्रशासन की जरूरी एडवाइजरी

लाहौल-स्पीति जिला प्रशासन ने यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। प्रशासन ने पर्यटकों को निर्देश दिया है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर लें। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम पल भर में बदल जाता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है। किसी भी आपदा से बचने के लिए आपदा प्रबंधन केंद्र की रिपोर्ट जांचना अनिवार्य है। खराब मौसम होने की स्थिति में पर्यटकों को ऊंचे इलाकों की ओर न जाने की सख्त सलाह दी गई है।

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