ट्रंप ने खारिज किया ईरान का 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव, कहा— ‘मुझे यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं’

Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए ईरान द्वारा दिए गए नवीनतम 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के प्रस्ताव की शर्तें उनके लिए स्वीकार्य नहीं हैं। ‘कान न्यूज’ (Kan News) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि हालांकि ईरानी पक्ष समझौता करने की इच्छा जता रहा है, लेकिन उनके द्वारा दी गई शर्तें असंतोषजनक हैं। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि वह ऐसी किसी भी बात पर सहमत नहीं हो सकते जो अमेरिकी और क्षेत्रीय हितों के खिलाफ हो।

30 दिनों के भीतर युद्ध खत्म करने की शर्त पर अड़ा ईरान

ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को जो प्रस्ताव सौंपा था, उसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर 30 दिनों के भीतर युद्ध समाप्त करने की मांग की गई थी। इसके जवाब में अमेरिका ने दो महीने के संघर्षविराम का विकल्प रखा था। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान के जरिए अमेरिका की प्रतिक्रिया तेहरान पहुंच चुकी है और फिलहाल इसकी समीक्षा की जा रही है। ईरान का दावा है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य केवल क्षेत्रीय संघर्ष खत्म करना है और इसमें परमाणु मुद्दे का कोई जिक्र नहीं है।

नेतन्याहू के लिए राष्ट्रपति हर्जोग से मांगा क्षमादान

इसी साक्षात्कार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के आंतरिक राजनीतिक घटनाक्रम पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने इजरायली राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमों में क्षमादान दे दें। ट्रंप का मानना है कि नेतन्याहू एक ‘वॉरटाइम’ प्रधानमंत्री हैं और उन्हें निरर्थक कानूनी बातों के बजाय युद्ध पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। ट्रंप ने कहा कि इजरायल के अस्तित्व के लिए उनका और नेतन्याहू का पद पर रहना अनिवार्य है।

सैन्य अभियान की सफलता पर जताया संतोष

मध्य पूर्व में जारी सैन्य गतिविधियों पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय सैन्य अभियान बहुत अच्छा चल रहा है और वे इसकी सफलता से संतुष्ट हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक ईरान एक ठोस और स्वीकार्य प्रस्ताव लेकर नहीं आता, तब तक सैन्य विकल्प मेज पर बने रहेंगे। ट्रंप के इस सख्त रुख ने एक बार फिर पश्चिम एशिया में कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को धुंधला कर दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम और अमेरिका की अंतिम प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति जारी

ट्रंप ने चर्चा के दौरान यह भी कहा कि ईरानी नेतृत्व आपस में बंटा हुआ नजर आ रहा है और वे समझौते के लिए सही कीमत चुकाने को तैयार नहीं हैं। अमेरिका की ओर से स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि किसी भी बड़े समझौते से पहले ईरान को अपनी परमाणु नीतियों और क्षेत्रीय हस्तक्षेप पर ठोस प्रतिबद्धताएं जतानी होंगी। तेहरान की ओर से प्रतिबंधों को हटाने और जमे हुए एसेट्स को रिलीज करने की मांग की जा रही है, जिस पर फिलहाल व्हाइट हाउस ने अपनी सहमति नहीं जताई है।

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