ईरान संकट पर ट्रंप का बड़ा बयान: ‘पॉजिटिव’ बातचीत के बीच शुरू होगा ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’, हटेगा समुद्री चोक

Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान के साथ जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी घोषणा की है। ट्रंप ने कहा कि उनके प्रतिनिधि ईरान के साथ “बेहद सकारात्मक” बातचीत कर रहे हैं, जिसके सुखद परिणाम जल्द सामने आ सकते हैं। हालांकि, बातचीत के बीच उन्होंने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ (Project Freedom) का भी ऐलान किया है। इसके तहत सोमवार से अमेरिकी नौसेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में महीनों से फंसे वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान शुरू करेगी।

ईरान का 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव और अमेरिका का जवाब

ईरान ने युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक 14-सूत्रीय शांति योजना सौंपी है। इस योजना में लेबनान और ईरान में जारी संघर्ष को 30 दिनों के भीतर खत्म करने का प्रस्ताव दिया गया है। ट्रंप ने रविवार को स्पष्ट किया कि वे इस प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कुछ शर्तों को ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए पाकिस्तान के माध्यम से अपना जवाब तेहरान को भेज दिया है। फिलहाल ईरान इस जवाबी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।

28 फरवरी का वह हमला जिसने बदल दी मध्य पूर्व की तस्वीर

बता दें कि इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एक बड़ा संयुक्त हमला किया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध छिड़ गया था। ईरान ने इसके जवाब में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की घेराबंदी कर दी थी। 8 अप्रैल से दोनों देशों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम लागू है, जिसे स्थाई शांति में बदलने की कोशिशें जारी हैं।

‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’: मानवीय आधार पर जहाजों का रेस्क्यू

ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैकड़ों जहाज और चालक दल फंसे हुए हैं, जिनके पास भोजन और रसद की कमी हो रही है। उन्होंने इसे एक ‘मानवीय मिशन’ बताया है। ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि यदि अमेरिकी नौसेना के इस रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी भी तरह का हस्तक्षेप किया गया, तो उसका जवाब सैन्य ताकत से दिया जाएगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस मिशन के लिए 15,000 सैनिकों और कई युद्धपोतों को तैनात कर दिया है।

इस्लामाबाद में चल रही है निर्णायक दौर की बातचीत

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का मुख्य केंद्र बनी हुई है। हालांकि युद्धविराम लागू है, लेकिन अब तक किसी ठोस और स्थाई समाधान पर सहमति नहीं बन सकी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान को अपनी पिछली “गलतियों” की भारी कीमत चुकानी होगी। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के दौरान दोनों देशों के बीच फिर से संघर्ष शुरू होगा या कूटनीति के जरिए शांति का रास्ता निकलेगा।

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