Nepal News: नेपाल की बालेन शाह सरकार को भारतीय सामानों पर भारी कस्टम ड्यूटी लगाने के फैसले के बाद जबरदस्त जन आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। ताजा खबरों के मुताबिक, चौतरफा विरोध और सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते तनाव को देखते हुए सरकार इस विवादित फैसले को वापस लेने पर विचार कर रही है। अप्रैल 2026 में लागू हुए इस नियम ने दशकों पुरानी खुली सीमा की व्यवस्था और दोनों देशों के बीच सहज व्यापार संबंधों में एक बड़ा गतिरोध पैदा कर दिया है।
सिर्फ 100 रुपये के सामान पर भी देना होगा टैक्स
प्रधानमंत्री बालेन्द्र ‘बालेन’ शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने अप्रैल के मध्य में नेपाली नव वर्ष के बाद अचानक कस्टम नियमों को कड़ा कर दिया। नए नियमों के अनुसार, भारत से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के किसी भी सामान पर सीमा शुल्क देना अनिवार्य है। वस्तुओं की श्रेणी के आधार पर यह टैक्स 80% तक वसूला जा रहा है। सीमा चौकियों पर तैनात अधिकारी अब आलू चिप्स जैसे छोटे पैकेटों की भी तलाशी ले रहे हैं, जिससे जनता में भारी गुस्सा है।
आर्थिक और राजनीतिक संकट में घिरी सरकार
इस सख्ती के कारण बीरगंज, भैरहवा और राजधानी काठमांडू में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। स्थानीय लोग इसे ‘अघोषित नाकेबंदी’ कह रहे हैं, जिससे खेती और धार्मिक अनुष्ठानों का सामान लाना भी मुश्किल हो गया है। इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने भी 22 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और एक विवादित व्यवसायी से संबंधों के आरोप लगे हैं, जिससे सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
